'पहले मणिपुर को शांत कीजिए', केंद्रीय मंत्री वीके सिंह के पीओके वाले बयान पर संजय राउत का तंज
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 12 Sep 2023 11:54 AM
जब वीके सिंह से पूछा गया कि लोगों ने मांग की है पीओके को भारत में विलय किया जाए...तो उन्होंने कहा कि पीओके अपने आप ही भारत में विलय हो जाएगा, कुछ समय इंतजार करें. जानें संजय राउत ने मामले पर क्या दी प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने पाकिस्तान ऑक्युपाइड कश्मीर यानी PoK को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने दौसा में कहा कि कुछ समय बाद अपने आप ही पीओके भारत में आकर मिल जाएगा. आप कुछ समय इंतजार कीजिए. वीके सिंह ने सोमवार को बीजेपी की ‘परिवर्तन यात्रा’ के तहत दौसा में मीडिया से बात करते हुए उक्त बात कही.
#WATCH PoK अपने आप भारत के अंदर आ जाएगा, थोड़ा सा इंताज़ार करना होगा: PoK के लोगों की मांग पर कि उन्हें भारत में विलय किया जाए पर केंद्रीय मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह (11.09.2023) pic.twitter.com/svlTXL3SQ6
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 12, 2023
वीके सिंह के बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया आ रही है. शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) सांसद संजय राउत ने कहा कि हमने हमेशा PoK को अपना हिस्सा बताया है. जब पूर्व सेना प्रमुख अपने पद पर थे तब उनको अपने कार्यकाल में (पीओके को) लेने की कोशिश करनी चाहिए थी, अब आप कैसे ले सकते हैं? इससे पहले मणिपुर को शांत कीजिए. मणिपुर तक चीन घुस गया है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी जी कह रहे हैं कि लद्दाख में चीन ने 20,000 वर्ग किमी ज़मीन अपने कब्जे में ली है. अरुणाचल का हिस्सा चीन के नक्शे में दिखाया गया है. पहले यह अपने कब्जे में लीजिए.
क्या कहा वीके सिंह ने
केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह ने सोमवार को कहा कि जी20 सम्मेलन की भव्यता ने भारत को विश्व मंच पर अनूठी पहचान दिलाई है और भारत ने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है. पार्टी के बयान के अनुसार सिंह ने कहा कि जी20 की बैठक ‘ना भूतो न भविष्यति’ के रूप मे हुई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व में अपना लोहा मनवा दिया. जी20 समूह में विश्व के सभी शक्तिशाली देश शामिल हैं. सभी देशों ने भारत की मुक्त कंठ से प्रशंसा की है.
#WATCH हमने हमेशा PoK को अपना हिस्सा बताया है। जब पूर्व सेना प्रमुख अपने पद पर थे तब उनको अपने कार्यकाल में (पीओके को) लेने की कोशिश करनी चाहिए थी, अब आप कैसे ले सकते हैं? इससे पहले मणिपुर को शांत कीजिए। मणिपुर तक चीन घुस गया है। राहुल गांधी जी कह रहे हैं कि लद्दाख में चीन ने… https://t.co/v1rNcFG51l pic.twitter.com/xdMUp0Rpja
— ANI_HindiNews (@AHindinews) September 12, 2023
उन्होंने कहा कि PoK अपने आप भारत के अंदर आ जाएगा, थोड़ा सा इंताजार करने की जरूरत है. PoK के लोगों की मांग पर कि उन्हें भारत में विलय किया जाए पर केंद्रीय मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वीके सिंह ने यह बात कही.
क्या है पीओके जानें
पीओके की बात जब आती है तो कई लोग सोचने लगते हैं कि आखिर यह क्षेत्र क्या है और क्यों बार-बार इसका नाम सामने आता है. दरअसल, 1947 में मिली आजादी और बंटवारे से पहले जम्मू-कश्मीर का अस्तित्व एक स्वतंत्र रियासत के तौर पर था. लेकिन 1947 में ही पाकिस्तान की सीमा से सटे जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर जबरन कब्जा करने का काम किया गया जो अब तक कायम है. पाकिस्तान की सेना और आईएसआई इस स्थान को आतंकवादी कैंपों के तौर पर इस्तेमाल में लाती है.
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भारत-पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर के विवाद के बीज अंग्रेज की दिमाग की सोच थी. 1947 में जब भारत को स्वतंत्रता मिली उस वक्त अंग्रेजों ने रियासतों पर अपना-अपना दावा छोड़ दिया. उनके द्वारा कहा गया कि भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का निर्णय खुद लें. जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरिसिंह ने पहले तो स्वतंत्र राज्य के तौर पर बने रहना चाहा लेकिन पख्तूनों के हमले के बाद उन्होंने भारत से मदद की गुहार लगाई. इसी दौरान पाकिस्तान से लगे कश्मीर के हिस्से पर कब्जा कर लिया गया जो आज पीओके कहलाता है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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