पीएम मोदी की अपील से आभूषण उद्योग में हडकंप, एक करोड़ लोगों पर पड़ सकता है असर

Published by :Pritish Sahay
Published at :11 May 2026 6:55 PM (IST)
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PM Modi

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फोटो- पीटीआई

PM Modi: मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक साल तक सोना न खरीदने की अपील से रत्न और आभूषण उद्योग में चिंता बढ़ गई है. उद्योग संगठनों का कहना है कि इससे कारोबार और एक करोड़ से ज्यादा लोगों के रोजगार पर असर पड़ सकता है.

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PM Modi: मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर भारत पर भी पड़ रहा है. कच्चे तेल की कीमतों बढ़ गई हैं. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की है कि वो एक साल तक सोना नहीं खरीदें. पीएम मोदी की इस अपील से रत्न और आभूषण उद्योग की चिंता बढ़ गई है. उद्योग संगठनों का कहना है कि इस कदम का रोजगार और कारोबार पर विपरीत असर पड़ सकता है.

एक करोड़ से ज्यादा लोगों की आजीविका पर असर की आशंका

अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण परिषद के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा- रत्न और आभूषण उद्योग प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से एक करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है. ऐसे में सोने की खरीद टालने की अपील से इस उद्योग पर दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि भारत में पहले से हजारों टन सोना घरों में पड़ा हुआ है. इसलिए समाधान केवल मांग कम करने में नहीं, बल्कि स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (GMS) के जरिए मौजूदा सोने के बेहतर उपयोग में है.

‘रिवेंज बाइंग’ बढ़ा सकती है मांग

रोकड़े ने कहा कि अतीत में ऐसे मामलों में रिवेंज बाइंग यानी प्रतिबंध या रोक के बाद अचानक ज्यादा खरीदारी देखने को मिली है. इससे भविष्य में सोने की मांग और बढ़ सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, बीमा (BFSI), खुदरा व्यापार, ई-कॉमर्स, आभूषण डिजाइनिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि ऐसे में हम सरकार से इस फैसले पर फिर से विचार करने अपील करते हैं.

स्वर्ण मौद्रीकरण योजना को बताया दीर्घकालिक समाधान

जीजेसी के उपाध्यक्ष अविनाश गुप्ता ने कहा कि सोने का भारतीय परिवारों से भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है, लेकिन मौजूदा हालात में आर्थिक स्थिरता के लिए मांग और आयात के बीच संतुलन जरूरी है. उन्होंने कहा कि ऐसे में आभूषण उद्योग का मानना है कि एक मजबूत और पारदर्शी स्वर्ण मौद्रीकरण योजना (Gold Monetization Scheme) भारत के लिए लंबे समय वाला समाधान साबित हो सकती है. इससे घरों और लॉकरों में पड़ा निष्क्रिय सोना औपचारिक अर्थव्यवस्था में आएगा, आयात घटेगा और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होगा. इससे वित्तीय प्रणाली मजबूत होगी.

क्या है स्वर्ण मुद्रीकरण योजना

स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (Gold Monetization Scheme- GMS) भारत सरकार की ओर से नवंबर 2015 में शुरू की गई एक पहल है. इसका मकसद परिवारों, ट्रस्टों और संस्थानों के पास निष्क्रिय पड़े सोने- जैसे आभूषण और सिक्कों को उत्पादक उपयोग में लाना है. इस योजना के तहत लोग अपना सोना बैंकों में जमा कर सकते हैं और उस पर ब्याज प्राप्त कर सकते हैं. इसके साथ ही, उन्हें सोने की कीमतों में बढ़ोतरी का लाभ भी मिलता है.

पीएम मोदी ने की थी विदेशी मुद्रा बचाने की अपील

रविवार (10 मई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैदराबाद में एक रैली के दौरान लोगों से ईंधन का कम इस्तेमाल और सोने की खरीद टालने और विदेशी यात्राएं कम करने की अपील की थी. ताकि मिडिल ईस्ट संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार की बचत की जा सके.

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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