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सियासी संग्राम के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पेगासस मामला, रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करने की अपील

Updated at : 30 Jan 2022 12:31 PM (IST)
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सियासी संग्राम के बीच सुप्रीम कोर्ट पहुंचा पेगासस मामला, रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज करने की अपील

सुप्रीम कोर्ट के वकील एमएल शर्मा ने अपनी याचिका में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला दिया है कि भारत सरकार ने वर्ष 2017 में मिसाइल प्रणाली सहित हथियारों के लिए करीब 2 बिलियन डॉलर के पैकेज के हिस्से के रूप में पेगासस की खरीद की थी.

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नई दिल्ली : पेगासस जासूसी मामला एक बार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. भारत के सर्वोच्च अदालत में दायर की गई अर्जियों में नई अर्जी दायर की पिछले शुक्रवार को अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज करने की अपील की गई है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि इजरायल सरकार ने भारत के साथ रक्षा सौदे के साथ स्पाइसवेयर पेगासस को बेची थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया गया है. सुप्रीम कोर्ट में वकील एमएल शर्मा की ओर से नई याचिका दायर की गई है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील एमएल शर्मा ने अपनी याचिका में न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट का हवाला दिया है कि भारत सरकार ने वर्ष 2017 में मिसाइल प्रणाली सहित हथियारों के लिए करीब 2 बिलियन डॉलर के पैकेज के हिस्से के रूप में पेगासस की खरीद की थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले की जांच के लिए पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा गठित जस्टिस लोकुर आयोग पर पहले ही रोक लगा दिया है. उस दिन सुनवाई के दौरान कोर्ट को बंगाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि आयोग वैधानिक बॉडी है और उसे सरकार आदेश जारी नहीं कर सकती है.

सीजेआई ने लोकुर आयोग की जांच पर पहले ही लगा दी है रोक

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमणा ने लोकुर आयोग के द्वारा किसी भी तरह की जांच पर रोक लगाते हुए जांच आयोग को नोटिस जारी कर जवाब देने को कहा था. साथ ही, पश्चिम बंगाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा कि आप ने कहा था कि आप अब जांच कार्य में कुछ नही करेंगे. सिंघवी ने कहा कि आपके आदेश के मुताबिक, हमने आयोग को इसकी जानकारी दे दी थी. कोर्ट का आदेश है कि जब तक मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, तब तक आयोग जांच नही करेगा. सिंघवी ने सीजेआई से कहा कि आप आयोग को भी नोटिस जारी कर दें.

रिपोर्ट पर भारत में छिड़ी सियासी जंग

बता दें कि अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में भारत और इजराइल के बीच 2017 में हुए लगभग दो अरब डॉलर के अत्याधुनिक हथियारों एवं खुफिया उपकरणों के सौदे में पेगासस स्पाईवेयर तथा एक मिसाइल प्रणाली की खरीद शामिल रहने का दावा किये जाने पर शनिवार को एक बड़ा विवाद छिड़ गया. विपक्ष ने सरकार पर अवैध जासूसी करने में संलिप्त रहने का आरोप लगाया और इसे देशद्रोह करार दिया. विपक्षी दलों ने संकेत दिया कि वे सोमवार से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाएंगे, जबकि केंद्रीय मंत्री जनरल (सेवानिवृत) वीके सिंह ने द न्यूयार्क टाइम्स (एनवाईटी) को ‘सुपारी मीडिया’ करार दिया.

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कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से स्वत: संज्ञान लेने की अपील की

वहीं, द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से भी विषय का स्वत: संज्ञान लेने और जानबूझ कर उसे झांसा देने की कोशिश करने को लेकर सरकार के खिलाफ उपयुक्त दंडात्मक कार्यवाही शुरू करने का भी अनुरोध किया. मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसदीय समिति के अध्यक्ष शशि थरूर ने कि सरकार ने पेगासस पर आईटी समिति को जवाब नहीं देने का विकल्प चुना और जब इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी, तब भाजपा के कई सदस्यों द्वारा कोरम पूरा नहीं होने देने के लिए अपनाये गये रुख का भी यह मतलब है कि समिति ने सच्चाई को सामने लाने में कोई प्रगति नहीं की. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट विषय को देख रहा है और मेरी भी यही कामना है. यदि हमारी सरकार ने उस तरीके से पेगासस का इस्तेमाल किया है, जैसा कि आरोप लगाया गया है, तो यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है.

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