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पद्मभूषण इला भट्ट का निधन, आजीवन महिला अधिकारों के लिए किया संघर्ष, मल्लिकार्जुन खरगे ने जताया दुख

Updated at : 02 Nov 2022 5:08 PM (IST)
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पद्मभूषण इला भट्ट का निधन, आजीवन महिला अधिकारों के लिए किया संघर्ष, मल्लिकार्जुन खरगे ने जताया दुख

इला भट्ट को प्रसिद्ध गांधीवादी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए बहुत प्रयास किये थे. इला भट्ट ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए उनकी एक संस्था बनायी थी जिसे SEWA के नाम से जाना जाता है.

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Ela Bhatt passes away : पद्मभूषण, अधिवक्ता और देश की प्रसिद्ध एक्टिविस्ट इला भट्ट का आज निधन हो गया. इला भट्ट ने आजीवन महिला अधिकारों के लिए संघर्ष किया. इला भट्ट का निधन 89 साल की उम्र में हुआ है.

सेल्फ इंप्लायड वूमेन एसोसिएशन का किया गठन

इला भट्ट को प्रसिद्ध गांधीवादी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए बहुत प्रयास किये थे. इला भट्ट ने महिलाओं को सशक्त करने के लिए उनकी एक संस्था बनायी थी जिसे (सेल्फ इंप्लायड वूमेन एसोसिएशन) सेवा के नाम से जाना जाता है. इला भट्ट ने महिलाओं के लिए एक महिला बैंक की भी स्थापना की थी. उन्होंने 1973 में SEWA के काॅपरेटिव बैंक की स्थापना की थी. 1979 में उन्होंने महिलाओं के लिए विश्व बैंक की स्थापना की थी.


2011 में गांधी शांति पुरस्कार से किया गया था सम्मानित 

इला भट्ट को 1985 में देश का चौथा सर्वोच्च पुरस्कार पद्म श्री दिया गया है. उसके बाद 1986 में उन्हें पद्मू भूषण दिया गया. 2011 में उन्हें गांधी शांति पुरस्कार दिया गया. उन्हें 1977 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. इला भट्ट ने जेंडर सेंसिटिविटी एवं बाल विवाह के विरोध में भी काफी काम किया.

मल्लिकार्जुन खरगे ने जताया दुख

इला भट्ट के निधन पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संवेदना व्यक्त किया है. उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा कि वे अपने पीछे प्रेरक विरासत छोड़ गयी हैं. उन्होंने इला भट्ट के निधन पर दुख जतााया है.

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जयराम रमेश ने किया ट्‌वीट

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इला भट्ट के निधन पर शोक जताते हुए ट्‌वीट किया कि इला भट्ट वास्तव में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थीं और उन्होंने असंगठित क्षेत्र में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाई थीं. उन्होंने गुजरात से इसकी शुरुआत की और बाद में पूरे देश में उन्होंने यह प्रयास किया. SEWA उनकी सबसे बड़ी विरासत है और इसने लाखों महिलाओं और उनके परिवारों के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव किया है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

राजनीति,सामाजिक, इतिहास, खेल और महिला संबंधी विषयों पर गहन लेखन किया है. तथ्यपरक रिपोर्टिंग और विश्लेषणात्मक लेखन में रुचि. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक. IM4Change, झारखंड सरकार तथा सेव द चिल्ड्रन के फेलो के रूप में कार्य किया है. पत्रकारिता के प्रति जुनून है. प्रिंट एवं डिजिटल मीडिया में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव.

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