Air Pollution : दिल्ली के लोगों से ज्यादा खतरनाक स्थिति में जीते हैं झारखंड के कोल माइंस निवासी

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 02 Nov 2022 3:48 PM

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फेफड़ों के जरिये अवशोषित होकर जहरीले कैमिकल रक्त में पहुंच जाते हैं. रक्त में जहरीले कैमिकल की उपस्थिति से शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं और कई तरह की बीमारियां फैलती हैं.

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Air Pollution : दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण की वजह से आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो रही है. मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डाॅ अरविंद कुमार ने मीडिया से बात करते हुए प्रदूषण और उससे होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकरी दी. प्रदूषण ना सिर्फ मानव जाति बल्कि पृथ्वी के हर प्राणी के लिए खतरनाक है. इस स्थिति में प्रदूषण के खतरे को भांपना बहुत जरूरी है, वह भी सिर्फ दिल्ली में नहीं बल्कि पूरे देश में.

आंखों के लिए खतरनाक है प्रदूषण

डाॅ अरविंद ने बताया कि आंखों से संबंधित कई परेशानी आम लोगों में नजर आ रही है. जिसमें आखों में जलन के अलावा आंखें लाल होना, आंखों से पानी आना और आंखों में खुजली होना है. इसके अलावा आंखों का सूखापन, नाक में जलन और मुंह का स्वाद बदलने जैसी समस्या भी सामने आ रही है. अगर आप अपने हाथ से जीभ को छूते हैं तो धातु का स्वाद आता है साथ ही गले में दर्द और सूखेपन की शिकायत सामने आती है.

फेफड़ों के जरिये रक्त में पहुंचता है खतरनाक केमिकल

डाॅ अरविंद ने बताया कि जैसे ही धुआं छाती के अंदर जाता है यह श्वासनली और फेफड़ों में सूजन का कारण बनता है. यह सूजन बहुत खतरनाक होता है. फेफड़ों के जरिये अवशोषित होकर ये जहरीले कैमिकल रक्त में पहुंच जाते हैं. रक्त में जहरीले कैमिकल की उपस्थिति से शरीर के सभी अंग प्रभावित होते हैं और कई तरह की बीमारियां फैलती हैं.

बच्चों के मस्तिष्क पर पड़ता है खतरनाक असर

डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि इन दिनों जो मरीज ज्यादा देखने को मिल रहे हैं उनमें सीने में संक्रमण और निमोनिया के मरीज शामिल हैं. यह स्थिति सिर्फ और सिर्फ वायु प्रदूषण की वजह से उत्पन्न हुई है. इसके साथ ही बच्चों के मस्तिष्क पर दीर्घकालिक प्रभाव भी प्रदूषण की वजह से देखने को मिलता है. बच्चों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है. खतरनाक कैमिकल की वजह से न्यूरो सूजन के मामले भी बढ़ रहे हैं.

प्रदूषण ने बढ़ाया स्ट्रोक का खतरा

डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि वृद्ध लोगों में प्रदूषण की वजह से स्ट्रोक का खतरा लगातार बढ़ रहा है. एक तरह से वृद्ध लोगों में प्रदूषण की वजह से स्ट्रोक का खतरा 10 गुणा बढ़ जाता है. डाॅ अरविंद ने यह राय तब दी है जब दिल्ली के कुछ इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक(AQI) गंभीर श्रेणी में पहुंच गया है. यहां का (AQI) आज बुधवार को 354 मापा गया. वहीं एयरपोर्ट और विश्वविद्यालय के पास यह क्रमश: 350 और 387 रहा.

दिल्ली से खराब स्थिति में जीते हैं कोयला खदान के आसपास रहने वाले

यहां गौर करने वाली बात यह है कि दिल्ली में आज प्रदूषण की जो स्थिति है, उससे ज्यादा खराब स्थिति में धनबाद और झरिया के लोग रहते हैं. हाल ही में शिकागो यूनिवर्सिटी ने अपने अध्ययन में खुलासा किया है कि धनबाद में पहले PM 10 के कारण होने वाला वायु प्रदूषण चिंता का सबब था. लेकिन, शिकागो यूनिवर्सिटी ने अपने अध्ययन बताया है कि धनबाद की आबोहवा में पीएम 2.5 के तेजी से बढ़ते स्तर से मानव जीवन को बहुत खतरा है.

पीएम 2.5 का स्तर बना चिंता की वजह

इस अध्ययन में यह कहा गया है कि हवा में मौजूद PM 10 के धूलकण भारी होने की वजह से लंबे समय तक हवा में टीके नहीं रह सकते हैं और जल्दी ही जमीन पर आ गिरते हैं, जबकि पीएम 2.5 के पार्टिकल्स काफी छोटे और महीन धूलकण होते हैं. यह हवा में लंबे समय तक टीके रह सकते हैं और लोगों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि धनबाद में पीएम 2.5 का स्तर चिंता का कारण बन गया है.

धनबाद में पीएम 2.5 का Average Concentration 65.4 माइक्रोग्राम

धनबाद में पीएम 2.5 का Average Concentration 65.4 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर है. यह WHO द्वारा तय मानक से करीब 13 गुना अधिक है. इस स्थिति में आम आदमी की आयु सात साल तक कम हो रही है. लेकिन धनबाद में मौजूद इस प्रदूषण की ओर सरकारों का ध्यान नहीं जाता है. गौरतलब है कि 2020 में ग्रीन पीस इंडिया की रिपोर्ट में धनबाद और झरिया को देश का सबसे प्रदूषित शहर बताया गया था. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि धनबाद और झरिया सहित उन सभी इलाकों में जहां कोयले का खनन होता है, प्रदूषण की स्थिति गंभीर है. कुछ समय पहले मिशिगन यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट आयी थी जिसमें यह कहा गया था कि प्रदूषण की वजह से महिलाओं में कई तरह की समस्याएं नजर आती हैं. जिनमें प्रमुख है उनका मोटापा बढ़ना, पीरियड्‌स में अनियमितता और गर्भधारण में परेशानी.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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