कूनो पार्क में एक और नामीबियाई चीते ने तोड़ा दम, पोस्टमार्टम के बाद 'शौर्य' की मौत का खुलासा
Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 16 Jan 2024 6:07 PM
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में एक और नामीबियाई चीते की मौत हो गई है. पोस्टमार्टम के बाद चीता शौर्य की मौत की पुष्टि की गई है.
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक और चीते की मौत की खबर आ रही है. बताया जा रहा है कि नामीबिया से लाए गए चीते की मौत हो गई है. चीता शौर्य की मौत की पुष्टि पोस्टमार्टम के बाद की गई है.
लॉयन परियोजना के निदेशक ने चीता शौर्य की मौत का किया खुलासा
लॉयन परियोजना के निदेशक ने चीता ‘शौर्य’ की मौत की पुष्टि की. उन्होंने पोस्टमार्टम के बाद बताया, कूनो नेशनल पार्क में शौर्य की मौत 16 जनवरी 2024 को दोपहर 3:17 बजे हुई.
Today, on 16th January, 2024 around 3:17 PM, Namibian Cheetah Shaurya passed away…Cause of death can be ascertained after Post Mortem: Director Lion Project pic.twitter.com/ISc2AlCNcy
— ANI (@ANI) January 16, 2024
कूनो नेशनल पार्क में अबतक 10 चीतों की हो चुकी है मौत
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में अबतक कुल 10 चीतों की मौत हो चुकी है. इनमें 7 चीते हैं और 3 शावक शामिल हैं. मालूम हो नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से कुल 20 चीते लाए गए थे. जिसमें नामीबियाई चीता ज्वाला ने 4 शावकों को जन्म दिया था.
कब-कब हुई चीतों की मौत
कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीतों की मौत का सिलसिला जारी है. 2023 में बड़ी संख्या में चीतों की मौत हुई थी. 27 मार्च को मादा चीता साशा की मौत किडनी में संक्रमण की वजह से हुई थी. उसके बाद 23 अप्रैल 2023 को उदय की भी मौत हो गई थी. 9 मई 2023 को चीता दक्षा की मौत हो गई थी.
साशा की मौत – 27 मार्च
उदय की मौत- 23 अप्रैल
दक्षा की मौत- 9 मई
ज्वाला के तीन शावकों की मौत- 23 मई
तेजस क मौत- 11 जुलाई
सूरज – 14 जुलाई
धात्री की मौत- 2 अगस्त
नामीबिया से 8 और दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था
चीता परियोजना के तहत नामीबिया से आठ चीतों (पांच मादा और तीन नर) को 17 सितंबर 2022 में केएनपी के बाड़ों में छोड़ा गया था. जबकि फरवरी 2023 में, अन्य 12 चीतों को दक्षिण अफ्रीका से पार्क से लाया गया था.
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अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.
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