Mahakumbh Stampede: महाकुंभ ही नहीं इन भगदड़ों में भी हुई थी दर्जनों मौतें, यहां देखिए देश के 10 बड़े भगदड़

Published by : Pritish Sahay Updated At : 29 Jan 2025 7:03 PM

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Mahakumbh Stampede

Maha Kumbh Stampede: बीते सालों में धार्मिक कार्यक्रमों में भगदड़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. साल 2024 के जुलाई महीने में यूपी के हाथरस में स्वयंभू भोले बाबा के सत्संग में भगदड़ मच गई थी. भगदड़ के कारण 121 लोगों की मौत हुई थी. देश के कई शहरों में भगदड़ के कारण सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है.

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Mahakumbh Stampede: महाकुंभ के संगम क्षेत्र में आज यानी बुधवार को भगदड़ मचने से 10 से अधिक लोगों की जान चली गई है. देशभर से आए करोड़ों लोग मौनी अमावस्या के अवसर पर पवित्र स्नान करने आए थे. भगदड़ से पवित्र स्नान की खुशी मातम में बदल गई. बताया जा रहा है कि मौनी अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान के लिए करोड़ों तीर्थ यात्रियों के पहुंचने के कारण भगदड़ मच गई जिसमें कई लोगों के हताहत होने की खबर है. देश में इस तरह की भगदड़ कोई नई बात नहीं है. हाल के वर्षों में भारत में मंदिरों और अन्य धार्मिक आयोजनों में भगदड़ के कारण अनेक लोग हताहत हुए हैं.

जुलाई 2023 में भगदड़ के कारण हुई थी 121 की मौत

बीते सालों में धार्मिक कार्यक्रमों में भगदड़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. साल 2024 के जुलाई महीने में यूपी के हाथरस में स्वयंभू भोले बाबा के सत्संग में भगदड़ मच गई थी. भगदड़ के कारण 121 लोगों की मौत हुई थी, मृतकों में ज्यादातर महिलाएं थीं. वहीं 2008 में राजस्थान के चामुंडा देवी मंदिर में हुए भगदड़ में कम से कम 250 श्रद्धालु मारे गए थे. वहीं 2008 में ही हिमाचल प्रदेश के नैना देवी मंदिर में एक धार्मिक सभा में भगदड़ मचने से 162 लोगों की जान चली गई. इससे पहले साल 2005 में महाराष्ट्र के मंधार देवी मंदिर में भगदड़ के कारण 340 से अधिक श्रद्धालु मारे गए थे.

हाल के दिनों में भगदड़ के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है. एक नजर डालते हैं आंकड़ों पर

  • 2 जुलाई 2024- हाथरस के स्वयंभू भोले बाबा उर्फ ​नारायण साकार हरि बाबा के सत्संग में भगदड़ से 100 से अधिक लोग मारे गए थे. मरने वालों में महिलाओं और बच्चे भी शामिल थे.
  • 31 मार्च 2023 को इंदौर के एक मंदिर में हवन कार्यक्रम के दौरान एक प्राचीन कुएं का स्लैब के ढह गया था. हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई थी.
  • 1 जनवरी 2022 को माता वैष्णो देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की भगदड़ में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई थी.
  • 14 जुलाई 2015 को आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी में पुष्करम उत्सव के दौरान मची भगदड़ में 27 लोगों की मौत हो गई थी.
  • 3 अक्टूबर 2014 को पटना के गांधी मैदान में भगदड़ मचने से 32 लोग मारे गए थे.
  • 13 अक्टूबर 2013 को एमपी के दतिया के रतनगढ़ मंदिर में मची भगदड़ में 115 लोग मारे गए थे.
  • 19 नवम्बर 2012 पटना के अदालत घाट पर छठ पूजा के दौरान एक अस्थायी पुल के ढह जाने से मची भगदड़ में लगभग 20 लोग मारे गए थे.
  • 8 नवम्बर 2011- हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर हर-की-पौड़ी घाट पर भगदड़ में कम से कम 20 लोग मारे गए थे.
  • 14 जनवरी 2011- केरल के इडुक्की जिले के पुलमेडु में एक जीप के तीर्थयात्रियों को टक्कर मार देने के कारण मची भगदड़ में सबरीमाला के कम से कम 104 श्रद्धालु मारे गए थे.
  • 4 मार्च 2010- उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कृपालु महाराज के राम जानकी मंदिर में भगदड़ में लगभग 63 लोग मारे गए थे.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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