5 जून से बालू खनन पर लगेगा ब्रेक, घाटों पर लगेगा ताला, नियम तोड़ा तो होगी जेल

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 30 May 2026 5:42 PM

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सांकेतिक तस्वीर

Bihar Sand Mining: बिहार में 15 जून से तिलैया और ढाढ़र नदी से बालू खनन पूरी तरह बंद हो जाएगा. एनजीटी के आदेश के तहत यह रोक 15 अक्टूबर तक लागू रहेगी. इससे निर्माण कार्य प्रभावित होने की आशंका है. घाट संचालक मानसून से पहले तेजी से बालू स्टॉक करने में जुट गए हैं.

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Bihar Sand Mining: मेसकौर और सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बालू घाटों पर आगामी 15 जून से बालू के उठान पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश के बाद प्रशासन ने तिलैया और ढाढ़र नदी से बालू निकालने पर यह प्रतिबंध लगाया है. सरकारी आदेश के मुताबिक, यह पाबंदी 15 अक्टूबर तक लगातार जारी रहेगी. इस फैसले के कारण अगले चार महीनों तक इलाके में मकान और अन्य निर्माण कार्य पूरी तरह प्रभावित होने की आशंका है.

बालू घाट बंद होने की वजह से काम की तलाश में स्थानीय मजदूरों को दूसरे राज्यों में पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. अब तक इन घाटों के चालू रहने से सैकड़ों मजदूरों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिला हुआ था, जिससे उनके परिवार का खर्च चल रहा था. घाट चार महीने तक बंद रहने से इन गरीब मजदूरों के सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा.

14 जून से मॉनसून आने की उम्मीद, बालू बटोरने में जुटे ठेकेदार

मौसम विभाग ने राज्य में 14 जून से ही मॉनसून के प्रवेश करने की संभावना जताई है. भारी बारिश की आहट मिलते ही सभी घाट संचालक पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो गए हैं. यही वजह है कि इन दिनों ठेकेदारों के बीच मॉनसून आने से पहले ज्यादा से ज्यादा बालू स्टॉक करने की एक अंधी होड़ मची हुई है. सरकार के कड़े नियमों के अनुसार, सभी घाट संचालक अपने अलॉटेड बालू घाट से केवल 300 मीटर के दायरे में ही बालू का भंडारण या स्टॉक कर सकते हैं.

इस नियम को लेकर सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के एसएच 103 पर मंझवे से लेकर कटघरा तक संचालकों के बीच बालू संग्रहण की भारी आपाधापी देखी जा रही है. ठेकेदारों द्वारा सुबह से लेकर देर रात तक बालू को डंप करने का काम किया जा रहा है.

नदियों से गुजरता है रास्ता, स्टॉक खत्म होने पर बढ़ेंगे दाम

दिलचस्प बात यह है कि मेसकौर प्रखंड के भीतर एक भी आधिकारिक बालू घाट मौजूद नहीं है, लेकिन इसके बावजूद यहाँ से तिलैया और ढाढ़र नदी होकर गुजरती है. इसी वजह से एसएच-103 पर तीन अलग-अलग जगहों को चिन्हित करके बालू का बड़ा स्टॉक तैयार किया जा रहा है. बरसात के दिनों में नदियों में पानी बढ़ने के कारण भारी मशीनों से खनन करना बेहद मुश्किल और खतरनाक होता है.

इसी व्यावहारिक दिक्कत को देखते हुए सरकार ने केवल 15 जून तक ही नदियों से सीधे माइनिंग करने की इजाजत दी है. इसके बाद नदियों से नया बालू नहीं निकाला जा सकेगा और सिर्फ पहले से स्टॉक की गई मात्रा को ही बाजार में बेचा और खरीदा जा सकेगा. इस स्थिति का फायदा उठाकर संचालक बाद में ढुलाई और लोडिंग के नाम पर ग्राहकों से मोटी रकम वसूलते हैं, जिससे आम जनता के लिए बालू की कीमतें काफी बढ़ जाती हैं.

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नियम तोड़ा तो होगी सख्त कार्रवाई, खनन अधिकारी ने दी चेतावनी

बरसात के मौसम में तिलैया और ढाढ़र नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ने के कारण पानी के भीतर से बालू की सुरक्षित निकासी लगभग नामुमकिन हो जाती है. इस पूरे मामले को लेकर जिला खनन पदाधिकारी अमन कुमार ने बताया कि एनजीटी की गाइडलाइंस के तहत 15 जून से नदियों से बालू उठाने पर पूरी तरह कानूनी रोक रहेगी, जो 15 अक्टूबर तक लागू रहेगी. उन्होंने सभी घाट संचालकों को सख्त हिदायत दी है कि वे नदी घाट से अधिकतम 300 मीटर की दूरी तक ही बालू का भंडारण करें.

अगर कोई भी संचालक इस निर्धारित दूरी से आगे जाकर बालू को अवैध रूप से डंप करता हुआ पाया गया, तो प्रशासन उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा. उन्होंने यह भी साफ किया कि 300 मीटर के दायरे के भीतर बालू स्टॉक करने की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है. संचालक अपनी क्षमता के अनुसार कितना भी बालू जमा कर सकते हैं.


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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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