कंसाबती नदी में उफान : बांस का पुल डूबा, मेदिनीपुर-झाड़ग्राम का संपर्क टूटा

Author Jitesh borkar|Edited by Mithilesh Jha
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हर साल वही संकट, फिर डूबा बांस का पुल; स्थायी पुल की मांग तेज,जान जोखिम में डालकर लोग नांव से नदी कर रहे है पार | Prabhat Khabar Network

हर साल वही संकट, फिर डूबा बांस का पुल; स्थायी पुल की मांग तेज,जान जोखिम में डालकर लोग नांव से नदी कर रहे है पार | Prabhat Khabar Network

लगातार बारिश से कंसाबती नदी का जलस्तर बढ़ा. बांस का पुल डूबने से मेदिनीपुर और झारग्राम के बीच हजारों लोगों का संपर्क टूटा. स्थानीय लोग परेशान.

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Kharagpur News: लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से पश्चिम मेदिनीपुर और झारग्राम जिले के हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. कंसाबती नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से आमदई-कनकाबती फेरीघाट को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग और वर्षों पुराना बांस का पुल पूरी तरह पानी में डूब गया है. इसके साथ ही दोनों जिलों के बीच का महत्वपूर्ण ग्रामीण संपर्क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है.

प्रतिदिन इस पुल से झारग्राम प्रखंड की 5 से 7 ग्राम पंचायतों तथा पश्चिम मेदिनीपुर जिले की 2 से 3 ग्राम पंचायतों के हजारों लोग आवाजाही करते हैं. छात्र-छात्राएं, सरकारी और निजी कर्मचारी, छोटे व्यापारी, किसान तथा मरीजों के लिए यह सबसे सुविधाजनक और कम दूरी वाला मार्ग था. पुल के डूबते ही लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो गयी है.

स्थिति को देखते हुए फेरीघाट प्रशासन ने नाव सेवा शुरू करने का प्रयास किया, लेकिन नदी में पर्याप्त गहराई नहीं होने के कारण नावों का संचालन भी सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है. ऐसे में लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कई लोगों को लंबे वैकल्पिक मार्ग से अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है. इससे समय और धन, दोनों की अतिरिक्त बर्बादी हो रही है.

इसका सबसे अधिक असर विद्यार्थियों पर पड़ा है. विद्यासागर विश्वविद्यालय तथा विभिन्न कॉलेजों में पढ़ने वाले सैकड़ों छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. वहीं अस्पताल, सरकारी कार्यालय, बाजार और अन्य जरूरी कार्यों के लिए मेदिनीपुर शहर जाने वाले लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष मॉनसून के दौरान यही स्थिति बनती है.

बांस का पुल पानी में डूब जाता है और दोनों जिलों का संपर्क लगभग टूट जाता है. ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नाव से नदी पार करने को मजबूर हैं. इसके बावजूद आज तक इस स्थान पर स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका है. ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने और आमदई-कनकाबती फेरीघाट पर स्थायी पुल के निर्माण की मांग की है.

ग्रामीणों का कहना है कि यदि अब भी ठोस कदम नहीं उठाये गये तो हर वर्ष हजारों लोगों को इसी तरह परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाये हुए है. वहीं कंसाबती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से लोगों की चिंता भी बढ़ती जा रही है. यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है.


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