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तीरथ सरकार के सौ दिन पूरे, सीएम तीरथ सिंह रावत ने पत्रकारों के हित में उठाए सराहनीय कदम

Updated at : 17 Jun 2021 2:39 PM (IST)
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तीरथ सरकार के सौ दिन पूरे, सीएम तीरथ सिंह रावत ने पत्रकारों के हित में उठाए सराहनीय कदम

तीरथ सरकार ने अपने सौ दिनी कार्यकाल में यू तो कई अहम फैसले लिए. जनहितों के फैसलों पर उनकी पीठ भी खूब ठोकी गई. लेकिन पत्रकारों के हितों को जो अहमियत इस कार्यकाल में दी गई निसंदेह ही वह अपूर्व और सराहनीय है. इन सौ दिनों में तीरथ सरकार ने राज्य के दिवंगत हुए 18 पत्रकारों को परिजनों की मदद के लिए 90 लाख की राशि स्वीकृत की

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तीरथ सरकार ने अपने सौ दिनी कार्यकाल में यू तो कई अहम फैसले लिए. जनहितों के फैसलों पर उनकी पीठ भी खूब ठोकी गई. लेकिन पत्रकारों के हितों को जो अहमियत इस कार्यकाल में दी गई निसंदेह ही वह अपूर्व और सराहनीय है. इन सौ दिनों में तीरथ सरकार ने राज्य के दिवंगत हुए 18 पत्रकारों को परिजनों की मदद के लिए 90 लाख की राशि स्वीकृत की. इस निर्णय का जिक्र इसलिए भी जरूरी हो जाता है कि क्योंकि पत्रकार कल्याण की दिशा में इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ.

पत्रकारिता को लोकतंत्र का चैथा स्तंभ कहा जाता है. और निश्चित रूप से वह है भी, क्योंकि लोक कल्याण की दिशाएं निर्धारित करने तथा लोकतंत्र के अन्य स्तंभों को साधे रखने की जिम्मेदारी इसी चैथे स्तंभ पर है. प्रजा और राजा हो या शासन प्रशासन, मीडिया की निगरानी ही इन्हें भटकाव के हालातों से बचाती है.

  • प्रदेश के 18 दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को मदद स्वरूप 90 लाख की राशि स्वीकृत

  • पत्रकारों को फं्रट लाइन वर्कर माना और प्राथमिकता से दिया टीके का सुरक्षा कवच

इतिहास गवाह है कि स्वतंत्रता संग्राम से लेकर उत्तराखंड राज्य के आंदोलन के साथ ही हर संघर्ष दौर में यहां के पत्रकारों की अहम भूमिका रही है. यहां पत्रकारिता सदा ही लोक कल्याण के मिशन को लेकर चली है. निजी हितों को दर कर अभावों की जिंदगी जीते हुए भी यहां पत्रकार समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों और निष्ठाओं पर खरे रहे. विषम हालातों में भी समाज और परिवार का संतुलन उनके लिए आसान नहीं रहा. तो समाज के इन प्रहरियों में से कुछ हालातों से जूझते हुए असमय ही जिंदगी की जंग हार गए.

उनके परिजनो के सामने विछोह की पीड़ा के साथ आजीविका के लिए संघर्ष की मजबूरी है. पूर्व सरकारों की ओर से थोड़ा बहुत सहानुभति और भावनाओं के वेग जरूर उठते रहे. मगर सच है कि भावनाएं मन कोे तो कुछ समय के लिए जरूर दिलासा दे सकती हैं लेकिन पेट की भूख मिटाने वाली रोटी से उसका कोई वास्ता नहीं होता. उसके लिए तो एक ठोस इंतजाम चाहिए होते हैं. और वो इंतजाम कारण चाहे जो भी रहे हों लेकिन दुर्भाग्य से पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में नहीं हो सके.

सीएम तीरथ सरकार ने अपने सौ दिनी कार्यकाल में पत्रकारों के हित में अहम फैसले लिए. उत्तराखंड के 18 दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को पांच-पांच लाख की राशि स्वीकृत की गई. यह कदम बहुत सराहनीय है. इसके अलावा कोविड काल में फ्रंट लाइन वर्कर के रूप में काम करने वाले पत्रकारों को भी पूरी तव्वजो दी गई. उन्हें कोविड कफ्र्यू के बावजूद भी अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन के लिएआवाजाही की छूट रही.

और इससे भी अहम यह कि जब प्रदेश में कोविड का टीका आया तो फं्रट लाइन वर्करस् के साथ ही पत्रकारों को भी टीके का सुरक्षा कवच लगाया गया. तीरथ सरकार की यह संवेदनशीलता इस बात की तस्दीक करती है कि वह पत्रकार हितों के लिए बेहद संजीदा है. उन्हें कार्यकाल के सफल सौ दिनों की बधाई.

Posted by: Pritish Sahay

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