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Scheduled Caste: अनुसूचित जातियों का अध्ययन के लिए सरकार गठित करेगी पैनल! जानिए क्या मिलेगा फायदा?

Updated at : 19 Sep 2022 12:41 PM (IST)
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Scheduled Caste: अनुसूचित जातियों का अध्ययन के लिए सरकार गठित करेगी पैनल! जानिए क्या मिलेगा फायदा?

Scheduled Caste: अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के सूत्रों ने कहा कि उन्होंने इस तरह के कदम के लिए हरी झंडी दे दी है. पता चला है कि इस प्रस्ताव पर गृह, कानून, सामाजिक न्याय और अधिकारिता और वित्त मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है.

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Scheduled Caste: सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार अनुसूचित जातियों या दलितों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक राष्ट्रीय आयोग का गठन करने के लिए तैयार है. ये तैयारी विशेष तौर पर उनके लिए है जो हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के अलावा अन्य धर्मों में परिवर्तित हो गए हैं. बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार इस तरह के एक आयोग के गठन के प्रस्ताव पर सक्रिय रूप से चर्चा की जा रही है और जल्द ही एक निर्णय होने की संभावना है.

DOPT ने इस कदम के लिए दे दी हरी झंडी!

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के सूत्रों ने कहा कि उन्होंने इस तरह के कदम के लिए हरी झंडी दे दी है. पता चला है कि इस प्रस्ताव पर गृह, कानून, सामाजिक न्याय और अधिकारिता और वित्त मंत्रालयों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है. बता दें कि इस तरह के आयोग के गठन का कदम बहुत महत्वपूर्ण है. विशेषकर उनके लिए जिनका सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष कई याचिका लंबित है, जो ईसाई या इस्लाम में परिवर्तित होने वाले दलितों के लिए एससी आरक्षण का लाभ चाहते हैं.

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क्या कहता है संविधान?

बता दें कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950, अनुच्छेद 341 के तहत यह निर्धारित करता है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से अलग धर्म को मानने वाले किसी भी व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है. मूल आदेश जिसके तहत केवल हिंदुओं को एससी के रूप में वर्गीकृत किया गया था, 1956 में सिखों को शामिल करने के लिए और 1990 में बौद्धों को शामिल करने के लिए संशोधित किया गया था.

‘सरकार के रुख को रिकॉर्ड में रखेंगे’

30 अगस्त को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच को सूचित किया, जिसमें जस्टिस अभय एस ओका और विक्रम नाथ भी शामिल थे, कि वह याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे पर सरकार के रुख को रिकॉर्ड में रखेंगे. बेंच ने सॉलिसिटर जनरल को तीन सप्ताह का समय दिया और मामले को 11 अक्टूबर को सूचीबद्ध किया.

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