Farmers Protest : किसान आंदोलन को ऐसे मजबूत कर रहा है 'सेंट्रल इंटेलिजेंस', बाहरी तत्वों पर रहती है पैनी नजर

Amritsar: Members of various farmer unions participate in a protest against the Centre's farm reform laws, outside the Deputy Commissioner (DC) office in Amritsar, Monday, Dec. 14, 2020. (PTI Photo)(PTI14-12-2020_000132B)
Farmers Protest, kisan aandolan news, Kisan Central Intelligence, Modi government, 19 days old demonstration किसान संगठन ने अपने प्रदर्शन को मजबूत और एकजुट बनाये रखने के लिए जबरदस्त तैयारी कर रखी है. ऐसा बताया जा रहा है कि किसानों ने एक ऐसी टीम बना रखी है कि जो पूरे आंदोलन पर अपनी पैनी नजर बनाये रखी है. जिसे किसान सेंट्रल इंटेलिजेंस नाम दिया गया है. इसमें कई दिग्गज लोग शामिल हैं. इसी टीम की वजह से आंदोलन अब तक पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से जारी है. अब तक हिंसा की एक भी खबरें नहीं आयी हैं. जबकि आंदोलन को तोड़ने और बदनाम करने के लिए कई उपाय हुए.
Farmers Protest : केंद्र सरकार के कृषि कानून (farm laws) के खिलाफ हजारों किसानों का विरोध प्रदर्शन लगातार 19वें दिन जारी है. सरकार के साथ अब तक कोई बात नहीं बन पायी है. किसान कृषि कानून को पूरी तरह से रद्द करने की अपनी मांग पर अड़े हैं. वैसे हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान केंद्र के कृषि कानून का समर्थन भी किया है और कृषि मंत्री से मिलकर अपनी सहमति भी दे चुके हैं. अब सवाल उठता है कि आखिर नरेंद्र मोदी सरकार किसानों के प्रदर्शन को क्यों नहीं तोड़ पा रही है? जबकि अबतक कई प्रयास हो चुके हैं.
आंदोलन को मजबूत करने के लिए किसानों की खास तैयारी
किसान संगठन ने अपने प्रदर्शन को मजबूत और एकजुट बनाये रखने के लिए जबरदस्त तैयारी कर रखी है. ऐसा बताया जा रहा है कि किसानों ने एक ऐसी टीम बना रखी है कि जो पूरे आंदोलन पर अपनी पैनी नजर बनाये रखी है. जिसे किसान सेंट्रल इंटेलिजेंस नाम दिया गया है. इसमें कई दिग्गज लोग शामिल हैं. इसी टीम की वजह से आंदोलन अब तक पूरी तरह से शांतिपूर्ण तरीके से जारी है. अब तक हिंसा की एक भी खबरें नहीं आयी हैं. जबकि आंदोलन को तोड़ने और बदनाम करने के लिए कई उपाय हुए.
कैसे काम कर रही है किसानों की सेंट्रल इंटेलिजेंस
भारतीय किसान संगठन के नेता राकेश टिकैत ने बताया कि सरकार की खुफिया एजेंसी से कहीं मजबूत है उनकी सेंट्रल इंटेलिजेंस. उनके पास सीसीटीवी कैमरे नहीं हैं, लेकिन किसानों की नजर दूर तक साफ देख लेती है. उन्होंने बताया, इसमें सेना और दूसरी नौकरियों से रिटायर हो चुके लोगों को काम में लगाया गया है. युवाओं को भी इस काम में लगाया गया है.
टीम के सदस्य आंदोलन में शामिल लोगों से सवाल पूछते हैं और संतुष्ट होने पर ही उन्हें इंट्री दी जाती है. आंदोलन में शामिल युवा साथी रात भर चौकन्ने रहते हैं. मोबाइल से छोटे-छोटे वीडियो बनाते हैं, जिसकी जांच बाद में की जाती है कि कहीं कोई संदिग्ध व्यक्ति तो शामिल नहीं हुआ है.
किसान नेता ने बताया कि गाजीपुर बॉर्डर पर हाल ही में कुछ गलत लोग आंदोलन में शामिल होने की कोशिश कर रहे थे, जिसे बाद में बाहर निकाला गया. एक और किसान नेता ने बताया, रात में आंदोलन पर नजर रखने के लिए युवाओं की अलग टीम बनायी गयी है, जो रातभर जागकर पूरे प्रदर्शन स्थल की निगरानी करते हैं. अगर कुछ गलत लगता है तो तुरंत अपने वरिष्ठ साथियों को उनकी जानकारी देते हैं.
गौरतलब है कि 19 दिनों से किसान अपनी मांग को लेकर दिल्ली के बॉर्डर पर जमे हुए हैं. किसान कृषि कानून को रद्द करने की मांग कर रहे हैं और सरकार इसपर संशोधन की बात कह रही है. किसानों ने एक दिन के लिए भारत बंद भी कर दिया था और 14 दिसंबर को भूख हड़ताल पर भी बैठे. किसानों ने चेतावनी दे है कि अगर सरकार उनकी बात नहीं मानती है, तो 18 दिसंबर को राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे.
posted by – arbind kumar mishra
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