ePaper

Delhi Election 2025: एआई का इस्तेमाल करने पर पार्टियों को देनी होगी जानकारी

Updated at : 16 Jan 2025 4:41 PM (IST)
विज्ञापन
AI Spend in India

AI Spend in India

एआई के बढ़ते खतरे को देखते हुए चुनाव आयोग ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों के लिए दिशानिर्देश जारी किया. दिशा निर्देश में कहा गया है कि राजनीतिक दल को यह बताना होगा कि यह फोटो या कंटेंट एआई जेनरेटेड है. यह दिशा निर्देश सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिवों के नाम पर जारी किया गया है.

विज्ञापन

Delhi Election 2025: चुनाव में राजनीतिक पार्टियों की ओर तकनीक के इस्तेमाल का प्रयोग बढ़ता जा रहा है. आम लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सोशल मीडिया प्रमुख साधन बन चुका है, लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) का इस्तेमाल राजनीतिक दल अपने फायदे के लिए कर रहे हैं. एआई के दुरुपयोग की संभावना अधिक है और इसका प्रयोग विरोधी के खिलाफ दुष्प्रचार को लेकर किया जा सकता है. एआई के बढ़ते खतरे को देखते हुए चुनाव आयोग ने गुरुवार को सभी राजनीतिक दलों के लिए दिशानिर्देश जारी किया.

दिशा निर्देश में कहा गया है कि राजनीतिक दल को यह बताना होगा कि यह फोटो या कंटेंट एआई जेनरेटेड है. यह दिशा निर्देश सभी राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिवों के नाम पर जारी किया गया है. चुनाव आयोग का कहना है कि फोटो, वीडियो, ऑडियो और अन्य सामग्री एआई से जेनरेटेड लिखी होने पर आम लोगों को वास्तविकता का पता लगेगा.

चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से इस दिशा निर्देश का पालन करने का कहा है ताकि चुनाव निष्पक्ष, पारदर्शी तरीके से हो सके. देखा गया है कि एआई के जरिए चुनाव प्रचार से लोगों की राय बदलने और चुनाव प्रक्रिया पर लोगों के सशंकित होने की संभावना बढ़ रही है. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भी सोशल मीडिया का प्रयोग जिम्मेदारी के साथ किया जा सके, इसके लिए दिशा निर्देश जारी किया गया था. चुनाव के दौरान डीप फेक वीडियो और ऑडियो लोगों की पसंद को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं क्योंकि ऐसे कंटेंट से लोगों को भ्रमित किया जा सकता है. 


एआई तकनीक का प्रयोग को लेकर मिली है कई शिकायतें

चुनाव के दौरान आम आदमी पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को लेकर एआई जेनरेटेड वीडियो जारी करने को लेकर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है. आरोप है कि आम आदमी पार्टी ने एआई जेनरेटेड वीडियो जारी कर गलत तथ्य पेश करने की कोशिश की. इन शिकायतों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने कदम उठाया है. मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने कहा कि डीप फेक और गलत सूचनाओं से चुनावी प्रक्रिया पर लोगों का विश्वास कम हो सकता है. ऐसे में यह राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे एआई का प्रयोग सावधानी से करे और चुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने में मदद करें.

चुनाव प्रचार में नयी तकनीक का प्रयोग लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इन तकनीक के जरिये गलत जानकारी और फेक न्यूज का खतरा भी बढ़ा है. लोगों को जागरूक करने के लिए गलत जानकारी पर रोक लगाना जरूरी है. विशेषज्ञों ने भी चुनाव आयोग को उभरती तकनीक के चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल को लेकर कानून बनाने की बात कह चुके हैं. दिल्ली चुनाव में अधिकांश दल एआई का इस्तेमाल कर एक-दूसरे के खिलाफ वीडियो, ऑडियो जारी कर रहे हैं. इस तकनीक के कारण आम लोगों में कंटेंट की विश्वसनीयता का पता लगाने में परेशानी हो रही है और यह चुनाव में मतदान के तरीके को प्रभावित कर सकता है. 

विज्ञापन
Vinay Tiwari

लेखक के बारे में

By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola