ट्रंप की अपील; पाकिस्तान का साफ इनकार, बोले रक्षा मंत्री- अब्राहम अकॉर्ड्स पर विचारधारा से समझौता नहीं
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 26 May 2026 10:13 AM
डोनाल्ड ट्रम्प और शहबाज शरीफ. फोटो- एक्स.
Pakistan Refuses Abraham Accords: पाकिस्तान ने अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने से इनकार कर दिया है. रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा जो देश की मूल विचारधारा के खिलाफ हो. डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से इस समझौते में शामिल होने की अपील की थी।
Pakistan Refuses Abraham Accords: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नए कूटनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने और पीस डील के प्रभाव में आते ही अरब देशों के सामने नई डिमांड रख दी है. उन्होंने एक चर्चा के दौरान खाड़ी देशों, जिसमें पाकिस्तान भी शामिल था, से अब्राहम अकॉर्ड्स को साइन करने की अपील की. यह एक ऐसी रेड लाइन है, जिसे अरब देश पार नहीं करना चाहते. इसी बीच इस ऑफर पर पाकिस्तान ने प्रतिक्रिया दी है. उसने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल अब्राहम अकॉर्ड्स का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि इस्लामाबाद ऐसा कोई समझौता स्वीकार नहीं करेगा, जो देश की ‘मूल विचारधारा’ के खिलाफ हो. पाकिस्तानी चैनल समा टीवी को दिए इंटरव्यू में आसिफ ने कहा, ‘मेरी व्यक्तिगत राय में पाकिस्तान को ऐसे किसी समझौते में शामिल नहीं होना चाहिए, जो हमारी बुनियादी विचारधारा से टकराता हो.’
उन्होंने इजरायल के साथ किसी संभावित समझौते की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए. आसिफ ने कहा, ‘आप उन लोगों के साथ कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बात पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?’ पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने आगे कहा कि इस मुद्दे पर इस्लामाबाद का रुख पूरी तरह स्पष्ट है और इसमें कोई बदलाव नहीं आया है. उन्होंने कहा, ‘हमारा स्टैंड बिल्कुल साफ है कि यह हमारे लिए स्वीकार्य नहीं है.’ आसिफ ने पाकिस्तान की पासपोर्ट नीति का जिक्र करते हुए भी इजरायल को मान्यता न देने की बात दोहराई. उन्होंने कहा, ‘हम दुनिया का शायद इकलौता देश हैं, जिसके पासपोर्ट पर इजरायल का नाम तक शामिल नहीं है.’
सऊदी अरब भी पुराने रुख पर कायम
वहीं सऊदी अरब ने भी इससे इनकार किया. उसने अपने पुराने स्टैंड को फिर से दोहराते हुए कहा कि जब तक फिलिस्तीन को मान्यता नहीं मिल जाती, वह इजरायल के बारे में फैसला नहीं करेगा. सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिलिस्तीन की आजादी के बाद ही रियाद इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कदम उठाएगा. फिलिस्तीन ही सऊदी अरब की प्राथमिकता है.
ट्रंप ने कई मुस्लिम देशों से की थी अपील
इससे पहले सोमवार को ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया ट्रुथ सोशल पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा था कि मध्य पूर्व में स्थायी शांति के लिए कई मुस्लिम और अरब देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि ईरान के साथ चल रही बातचीत ‘अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है’ और अगर समझौता सफल होता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए ‘ऐतिहासिक घटना’ साबित हो सकता है. ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों से एक साथ अब्राहम अकॉर्ड्स पर हस्ताक्षर करने की अपील की थी.
ट्रंप ने एक-दो देशों को दी थी छूट
हालांकि, अपने पोस्ट में ट्रंप ने यह भी कहा था कि एक या दो देश ऐसे हो सकते हैं, जिनके लिए इसे साइन करना संभव न हो, लेकिन अधिकतर देश इसे अप्रूव कर देंगे. विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इसमें पाकिस्तान और सऊदी अरब का ही जिक्र कर रहे हैं. सऊदी अरब का फिलिस्तीन वाला मसला और पाकिस्तान भी कमोवेश इसी वजह से इजरायल को मान्यता नहीं दे रहा है.

वैसे अपनी पोस्ट में ट्रंप ने पाकिस्तान के पीएम की जगह आर्मी चीफ आसिम मुनीर का जिक्र किया, यह पाकिस्तान के सत्ता की असली चाभी किसके पास, यही दर्शाता है.
ईरान को भी अब्राहम अकॉर्ड में शामिल करना चाहते हैं ट्रंप
उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो क्षेत्र फिर से बड़े संघर्ष की ओर लौट सकता है. ट्रंप ने लिखा, ‘या तो यह सभी के लिए शानदार समझौता होगा, या फिर कोई समझौता नहीं होगा.’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि सऊदी अरब और कतर को ईरान के साथ डील के बाद तुरंत इस समझौते में शामिल होना चाहिए और बाकी देशों को भी आगे आना चाहिए. इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में खुद ईरान को भी इस ढांचे का हिस्सा बनाया जा सकता है, अगर अमेरिका और तेहरान के बीच समझौता सफलतापूर्वक पूरा हो जाता है.
ट्रंप ने इसे क्षेत्र के इतिहास का ‘सबसे महत्वपूर्ण समझौता’ तक बताया और कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को अब्राहम अकॉर्ड्स का दायरा और देशों तक बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं. हालांकि, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान के लिए इसे साइन करना बहुत मुश्किल है. इन तीनों देशों के इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध तक नहीं हैं. हालांकि, ऐसा नहीं है कि सभी अरब देशों ने अब्राहम अकॉर्ड पर साइन नहीं किए हैं. यूएई और बहरीन वह पहले देश थे, जिन्होंने इसे अप्रूव किया है.
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क्या है अब्राहम अकॉर्ड्स?
अब्राहम अकॉर्ड्स 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुए ऐतिहासिक समझौते हैं. इनके तहत इजरायल को मान्यता देते हुए कई अरब देशों के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंध सामान्य किए गए थे. अब तक यूएई और बहरीन के अलावा मोरक्को, सूडान और कजाकिस्तान जैसे देश इस ढांचे से जुड़े बताए जाते हैं. ट्रंप का दावा है कि इन समझौतों से सदस्य देशों को आर्थिक और सामाजिक स्तर पर बड़ा फायदा मिला है.
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By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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