कांग्रेस ने फूंका जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव का बिगुल, सोनिया गांधी ने बनाई यह तगड़ी रणनीति
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Aug 2022 1:56 PM
सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर के इस्तीफे के बाद विकार रसूल वानी को इस पद पर आसीन किया है. गुलाम अहमद मीर ने कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई में करीब आठ साल तक प्रदेश अध्यक्ष के पद पर आसीन रहने के बाद पिछले जुलाई महीने में इस्तीफा दे दिया था.
नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य दर्जा समाप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद भंग विधानसभा के घाटी में निर्वाचन क्षेत्रों के निर्धारण के लिए परिसीमन का काम पूरा कर लिया गया है. इसके साथ ही, कांग्रेस की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस ने जम्मू-कश्मीर में संभावित विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही बिगुल फूंक दिया है. इसके लिए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष ने रणनीति तैयार करते हुए मोर्चाबंदी भी कर दी है.
पार्टी के आधिकारिक सूत्रों की ओर से मिल रही जानकारी के अनुसार, सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर के इस्तीफे के बाद विकार रसूल वानी को इस पद पर आसीन किया है. गुलाम अहमद मीर ने कांग्रेस की जम्मू-कश्मीर इकाई में करीब आठ साल तक प्रदेश अध्यक्ष के पद पर आसीन रहने के बाद पिछले जुलाई महीने में इस्तीफा दे दिया था. उनके इस्तीफे के बाद से यह पद खाली पड़ा हुआ था. विकार रसूल वानी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद का करीबी माना जाता है.
इसके साथ ही, कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर में पार्टी के वरिष्ठ नेता रमन भल्ला को प्रदेश का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किा है. वहीं, उन्होंने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के पूर्व नेता तारिक अहमद कर्रा को अभियान समिति के उपाध्यक्ष के तौर पर नामित किया है. इसके अलावा सोनिया गांधी ने प्रदेश के कई नेताओं को अहम जिम्मेदारी सौंपी है.
इतना ही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने जम्मू-कश्मीर का चुनावी किला फतह करने के लिए सात समितियों का गठन भी किया है. इसके लिए उन्होंने चुनाव अभियान समिति, राजनीतिक मामलों की समिति (पीएसी) समन्वय समिति, घोषणापत्र समिति, प्रचार एवं प्रकाशन समिति, अनुशासन समिति और प्रदेश चुनाव समिति का गठन किया है. हालांकि, सोनिया गांधी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद को प्रचार एवं प्रकाशन समिति का अध्यक्ष बनाना चाहती थीं, लेकिन आजाद ने उनके इस प्रस्ताव को मानने से इनकार कर दिया.
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बता दें कि जम्मू-कश्मीर में 5 अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 के विशेष प्रावधान खत्म किये जाने के बाद से ही विधानसभा अस्तित्व में नहीं है. हालांकि, विधानसभा चुनाव के लिए भारत के निर्वाचन आयोग की ओर से परिसीमन का काम पूरा हो चुका है, लेकिन सरकार और निर्वाचन आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तिथि को लेकर अभी तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है. अभी चुनाव की तारीखों का ऐलान होना अभी बाकी है.
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