सीबीएसई शुरू करेगा छठी से ग्यारहवीं के लिए तीन स्किल कोर्स
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अकादमिक सत्र -2020-21 में कक्षा छठवीं से ग्यारहवीं तक के छात्रों के लिए तीन नये स्किल पाठ्यक्रम शुरू करने का नोटिफिकेशन जारी किया है. नयी शिक्षा नीति के तहत सीबीएसई ने यह पहल की है. कक्षा छठवीं से लेकर ग्यारहवीं तक के छात्रों के लिए जो नये पाठ्यक्रम शुरू किये जायेंगे, उनमें डिजाइन थिकिंग, फिजिकल एक्टिविटी ट्रेनर एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस शामिल है.
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अकादमिक सत्र -2020-21 में कक्षा छह से ग्यारहवीं तक के छात्रों के लिए तीन नये स्किल पाठ्यक्रम शुरू करने का नोटिफिकेशन जारी किया है. नयी शिक्षा नीति के तहत सीबीएसई ने यह पहल की है. कक्षा छठवीं से लेकर ग्यारहवीं तक के छात्रों के लिए जो नये पाठ्यक्रम शुरू किये जायेंगे, उनमें डिजाइन थिकिंग, फिजिकल एक्टिविटी ट्रेनर एवं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस शामिल है. नयी पीढ़ी को अधिक रचनात्मक, कल्पनाशील और शारीरिक रूप से फिट बनाने एवं उनके लिए भविष्य में रोजगार के मौकों को बढ़ाने के इरादे से सीबीएसई यह शुरुआत कर रहा है.
मौजूदा सीबीएसई नीति के अनुसार, अगर दसवीं कक्षा में कोई छात्र तीन विषय (गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) में से किसी एक विषय में फेल हो जाता है, तो उसके अंक स्किल डेवलपमेंट कोर्स के अंकों से रिप्लेस कर दिये जायेंगे. स्किल डेवलपमेंट दसवीं में छठवां विषय होगा. यह विषय अन्य किसी एक विषय में फेल होने पर भी छात्र को अगली कक्षा में भेजने में उपयोगी होगा. हालांकि, यदि कोई छात्र असफल विषय में फिर से आना चाहता है, तो वह कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल हो सकता है. सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट में नोटिफिकेशन के माध्यम से स्किल पाठ्यक्रमों एवं मौजूदा सीबीएसई नीति की विस्तृत जानकारी दी है.
इन नये कोर्स के अलावा वर्तमान में सीबीएसई छात्रों के कौशल एवं दक्षता को बढ़ाने के लिए सेकेंडरी स्तर पर 17 स्किल इलेक्टिव कोर्स चला रहा है, जबकि सीनियर सेकेंडरी स्तर पर 37 स्किल इलेक्टिव कोर्स चलाये जा रहे हैं. इस समय 8543 सीबीएसई स्कूलों में 8 लाख से अधिक छात्र सेकेंडरी एवं सीनियर सेकेंडरी स्तर पर कौशल विषयों का अध्ययन कर रहे हैं.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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