नौकरी का लालच देकर बनाया 'गुलाम', म्यांमार में फंसे हैं 16 भारतीय, ओवैसी ने विदेश मंत्री से लगाई गुहार

Published by : Pritish Sahay Updated At : 22 Jan 2026 4:49 PM

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सांसद असदुद्दीन ओवैसी और विदेश मंत्री एस जयशंकर

Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक अपने एक सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया है कि म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर कम से कम 16 भारतीय नागरिकों को गुलाम की तरह रखा जा रहा है. उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से गुहार लगाई है कि वो इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें.

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Asaduddin Owaisi: एआईएमआईएम के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने दावा किया है कि 16 भारतीय नागरिकों को म्यांमार-थाईलैंड में गुलाम बनाकर रखा गया है. यही नहीं उन्हें कई तरह की यातनाएं भी दी जा रही है. उनसे जानवरों की तरह काम कराया जा रहा है. उनके साथ मारपीट भी की जा रही है. ओवैसी ने इस मामले में भारत के विदेश मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है.

कम से कम 16 भारतीय को बनाया गया गुलाम- ओवैसी

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि कम से कम 16 भारतीय नागरिकों को जिसमें तीन लोग हैदराबाद के हैं उन्हें थाईलैंड में नौकरी का वादा किया गया था, लेकिन उन्हें म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर पर ले जाकर गुलाम बना लिया गया है. उनसे हर दिन 18 से 20 घंटे काम करवाया जाता है. शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. उनके पासपोर्ट, फोन और मेडिकल सुविधाएं भी छीन ली गई हैं. ओवैसी ने बताया कि यह जानकारी हैदराबाद के उस्मान नगर के रहने वाले मीर सज्जाद अली से मिली है, जो अभी म्यांमार-थाईलैंड बॉर्डर पर कैद हैं. उनके साथ दो अन्य लोग मौला अली और बंजारा हिल्स के रहने वाले हैं.

झांसा देकर बुलाया गया था थाईलैंड

ओवैसी के मुताबिक इन भारतीय नागरिकों को नौकरी का झांसा देकर पहले थाईलैंड बुलाया गया. इसके बाद इन्हें जबरन म्यांमार-थाईलैंड सीमा पर ले जाया गया. उनके साथ गुलाम जैसा व्यवहार किया जा रहा है. ओवैसी ने विदेश मंत्री से अपील की है कि वो इस मामले में तत्काल दखल दें.

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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