भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ सबूत है तो कोर्ट जायें राहुल गांधी, कर्नाटक में गरजे अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बिना किसी सबूत के आरोप लगाती है. अगर उनके पास कोई सबूत है तो वे कोर्ट जायें और मुकदमा दर्ज करायें, उनके कह देने भर से यह सच नहीं हो जायेगा कि कर्नाटक में भाजपा हर काम के लिए 40 प्रतिशत कमीशन लेती है.
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के क्रम में गृहमंत्री अमित शाह ने आज हासन जिले के सकलेशपुर में एक रोड शो किया. इस दौरान अमित शाह ने कांग्रेस पर जमकर हमला किया और कांग्रेस को एक जातिवादी पार्टी बताया. अमित शाह ने कहा कि हम समाज और देश के सभी वर्ग के लोगों को साथ लेकर चलते हैं.
अमित शाह ने कहा कि बीजेपी ऐसी पार्टी है जिसने एससी-एसटी और ओबीसी को सम्मान दिलाया. अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी बिना किसी सबूत के आरोप लगाती है. अगर उनके पास कोई सबूत है तो वे कोर्ट जायें और मुकदमा दर्ज करायें, उनके कह देने भर से यह सच नहीं हो जायेगा कि कर्नाटक में भाजपा हर काम के लिए 40 प्रतिशत कमीशन लेती है. अमित शाह ने कहा कि सिर्फ आरोप लगाने से कुछ नहीं होगा, उनके आरोप पर जनता भरोसा नहीं करेगी.
#WATCH | "They can talk about it & should go to court if they have concrete evidence. Neither there's any probe nor there's any case. How will people believe in such baseless allegations?": Union Home Minister Amit Shah speaks on Congress & Rahul Gandhi's allegations of '40%… https://t.co/ekk0yB5L5W pic.twitter.com/fqOYcnjLdk
— ANI (@ANI) April 24, 2023
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कर्नाटक में एक सभा को संबोधित करते हुए बीजेपी सरकार पर यह आरोप लगाया था कि वह देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि कर्नाटक में भाजपा सरकार हर काम के लिए 40 प्रतिशत कमीशन लेती है. चाहे पुलिस वाले हों, इंजीनियर्स हों या फिर कोई और हों, सबको यह पता है. राहुल गांधी ने कहा कि भाजपा सरकार जो कमीशन लेती है उनका इस्तेमाल वह दूसरे पार्टी के विधायकों को खरीदने में इस्तेमाल करती हैं.
ज्ञात हो कि कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होना है. इस चुनाव को देखते हुए पार्टियां अपना जोर लगा रही हैं. जगदीश शेट्टार जैसे नेता का बीजेपी छोड़कर जाना उनके लिए एक झटका भी साबित हो सकता है. कांग्रेस इन नेताओं को साथ लेकर सत्ता तक पहुंचना चाहती है, ऐसे में यह देखना रोचक होगा कि 10 मई को जनता का वोट किसके खाते में ज्यादा आयेगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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