Air pollution in Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने कहा भगवान भरोसे दिल्लीवासियों को नहीं छोड़ सकते,सरकार जिम्मेदारी समझे
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 Nov 2023 2:48 PM
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने पर अविलंब रोक लगनी चाहिए. लेकिन अभी तक ना तो दिल्ली सरकार और ना ही पंजाब सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई की है. कोर्ट ने कहा कि हमने यह सुझाव भी दिया कि आप जैसा चाहें वैसा काम करें, लेकिन अबतक पराली जलाने को लेकर कुछ नहीं किया गया है.
Air pollution in Delhi-NCR: दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि दिल्ली में आज बारिश हो रही है, जिसकी वजह से प्रदूषण कुछ कम है. लेकिन क्या दिल्ली के लोग यह प्रार्थना करते रहेंगे कि आज बारिश हो जाए या फिर हवा चल जाए, ताकि उन्हें प्रदूषण से राहत मिले. बारिश के लिए ईश्वर का धन्यवाद, लेकिन सरकार को कोई शुक्रिया अदा नहीं की जानी चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट के जज संजय किशन कौल ने उक्त टिप्पणी आज दिल्ली के वायु प्रदूषण पर सुनवाई के दौरान की. उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए कई समितियां और बोर्ड हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनके कोई काम नजर नहीं आ रहे हैं. दिल्ली में कल रात से बारिश हो रही है, जिसकी वजह से AQI 100 तक पहुंच गया और लोगों को राहत मिली. लोधी गार्डन और कर्तव्य पथ पर आज लोग नजर आए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने पर अविलंब रोक लगनी चाहिए. लेकिन अभी तक ना तो दिल्ली सरकार और ना ही पंजाब सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई की है. कोर्ट ने कहा कि हमने यह सुझाव भी दिया कि आप जैसा चाहें वैसा काम करें, लेकिन अबतक पराली जलाने को लेकर कुछ नहीं किया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पराली जलाने को लेकर इमरजेंसी उपाय किए जाने चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और पंजाब सरकार से पूछा कि पराली को समाप्त करने के लिए क्या उपाय कर रहे हैं, ताकि वायु प्रदूषण ना हो. कोर्ट ने कहा कि हम यह चाहते है कि पराली को जलने से रोका जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर कहा कि किसानों को अधिक जिम्मेदार बनना होगा, वे समाज का अहम हिस्सा हैं. हमें उनके प्रति संवेदनशील बनना होगा, लेकिन लोगों को मरने के लिए भी नहीं छोड़ा जा सकता है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारें वायु प्रदूषण रोकने के लिए कोई कदम ना उठाएं और इसका बोझ अगर कोर्ट पर डालने की कोशिश करेंगी, तो यह नहीं चलेगा. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा कि उन्होंने वायु प्रदूषण पर उनके निर्देश के बाद आॅड-ईवेन योजना को किस हद तक लागू किया.
Also Read: World Cup 2023 : क्या सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड दोहराएगा 2019 का इतिहास, भारतीय टीम के लिए क्यों खतरा हैं कीवीजप्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










