बक्सर में घोटाले का खुलासा, पंचायतों से 344 नलकूप वापस लेने की तैयारी, मुखियाओं पर गिरेगी गाज
Published by : Ragini Sharma Updated At : 05 Jun 2026 10:15 AM
Buxar News: बक्सर में 344 सरकारी नलकूपों को पंचायतों से वापस लेने की तैयारी शुरू हो गई है. 16.33 करोड़ में से 4.28 करोड़ की उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित रहने पर विभाग सख्त कार्रवाई के मूड में है.
BuxarNews: (प्रशांत कुमार राय) बक्सर जिले में सात वर्ष पहले पंचायतों को सौंपे गए सरकारी नलकूपों को अब फिर से लघु सिंचाई विभाग अपने अधीन लेने की तैयारी कर रहा है. विभाग ने उन मुखियाओं के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिन्होंने नलकूपों के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) अब तक जमा नहीं किया है. विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के भीतर यूसी जमा नहीं करने पर संबंधित पंचायतों से राशि की वसूली की जाएगी और विभागीय कार्रवाई भी की जाएगी.
344 नलकूप पंचायतों को सौंपे गए थे
जानकारी के अनुसार वर्ष 2019 में जिले के कुल 344 राजकीय नलकूपों का संचालन एवं रखरखाव पंचायती राज संस्थाओं को सौंपा गया था. उस समय 150 नलकूप चालू स्थिति में थे, जबकि 194 नलकूप तकनीकी खराबी और मरम्मत के अभाव में बंद पड़े थे. बंद नलकूपों को चालू कराने और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार द्वारा 16 करोड़ 33 लाख रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी.
4.28 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित
विभागीय अभिलेखों के अनुसार अधिकांश पंचायतों ने खर्च की गई राशि का उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा कर दिया है, लेकिन अब भी 4 करोड़ 28 लाख रुपये के व्यय का प्रमाण पत्र लंबित है. कई पंचायतों ने वर्षों बीत जाने के बाद भी खर्च का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराया है, जिसे विभाग गंभीर वित्तीय अनियमितता मान रहा है.
घटती जा रही है नलकूपों की संख्या
वर्तमान स्थिति की समीक्षा में यह सामने आया है कि जिले में नलकूपों की कार्यक्षमता लगातार घट रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 325 नलकूपों में से 166 बंद पड़े हैं, जबकि केवल 159 ही चालू हालत में हैं. इससे किसानों को सिंचाई के लिए निजी संसाधनों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ रही है.
फेजवार खर्च और लंबित यूसी
प्रथम चरण में 8 करोड़ 6 लाख 78 हजार 88 रुपये दिए गए, जिसमें 41 लाख 34 हजार 327 रुपये का उपयोगिता प्रमाण पत्र लंबित है. द्वितीय चरण में 7 करोड़ 21 लाख 85 हजार 254 रुपये में से 3 करोड़ 17 लाख 85 हजार 599 रुपये का यूसी प्राप्त नहीं हुआ है. तृतीय चरण में 1 करोड़ 9 लाख 27 हजार 481 रुपये में से 70 लाख 77 हजार 689 रुपये का प्रमाण पत्र लंबित है.
विभाग ने शुरू की कार्रवाई
लघु सिंचाई विभाग का मानना है कि पंचायत स्तर पर नलकूपों के संचालन की व्यवस्था अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है. इसी को देखते हुए विभाग ने इन्हें पुनः अपने नियंत्रण में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. संबंधित पंचायतों और मुखियाओं को नोटिस भेजा जा रहा है.
क्या कहते हैं अधिकारी
कार्यपालक अभियंता रंजीत कुमार ने बताया कि उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं देने वाले मुखियाओं की सूची तैयार कर पंचायत राज पदाधिकारी को पत्र भेजा गया है. एक सप्ताह के भीतर यूसी जमा नहीं करने पर संबंधित मुखियाओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी.
किसानों को राहत देने की पहल
विभाग का मुख्य उद्देश्य नलकूपों को पुनः चालू कर किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हो और उत्पादन में वृद्धि हो सके.
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