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तीन तलाक: यदि मामला धार्मिक हुआ, तो दखल नहीं देगा सुप्रीम कोर्ट

Updated at : 12 May 2017 7:55 AM (IST)
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तीन तलाक: यदि मामला धार्मिक हुआ, तो दखल नहीं देगा सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली : देश में बहस का केंद्र बने मुसलिम समाज में तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरुवार को सुनवाई शुरू की. अदालत ने साफ किया है कि वह इस बात पर गौर करेगा कि क्या तीन तलाक मुसलमानों के मूल अधिकार का हिस्सा है. मुख्य न्यायाधीश […]

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नयी दिल्ली : देश में बहस का केंद्र बने मुसलिम समाज में तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गुरुवार को सुनवाई शुरू की. अदालत ने साफ किया है कि वह इस बात पर गौर करेगा कि क्या तीन तलाक मुसलमानों के मूल अधिकार का हिस्सा है.

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर की अगुआई वाली खंडपीठ ने कहा कि अगर तीन तलाक धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मौलिक अधिकार का हिस्सा है, तो हम कोई दखल नहीं देंगे. अदालत ने साफ कर दिया कि वह बहुविवाह के मुद्दे पर फिलहाल विचार नहीं करेगी. क्योंकि यह मुद्दा तीन तलाक से संबंधित नहीं है. प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ सात याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है. इनमें पांच याचिकाएं मुसलिम महिलाओं ने दायर की हैं, जिसमें तीन तलाक को असंवैधानिक बताया गया है. अदालत ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और इसे टाला नहीं जा सकता. प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कहा, ‘सभी पक्ष ऐसा कोई भी तर्क पेश कर सकते हैं जो वह पेश करना चाहते हैं, लेकिन उसमें किसी प्रकार का दोहराव नहीं होना चाहिए.’ पहले दिन मुख्य याचिकाकर्ता शायरा बानो के वकील ने कहा कि तीन तलाक से महिला के अधिकारों का उल्लंघन होता है.

अदालत मित्र सलमान खुर्शीद ने कहा कि तीन तलाक मुद्दा नहीं है, क्योंकि पति और पत्नी के बीच समझौते की कोशिश नहीं हुई तो ये फिर बेमतलब हो जाता है. शीर्ष अदालत ने स्वत: ही इस सवाल का संज्ञान लिया था कि क्या महिलाएं तलाक अथवा उनके पतियों द्वारा दूसरी शादी के कारण लैंगिक पक्षपात का शिकार होती हैं. इस मामले की सुनवाई इसलिए अधिक महत्वपूर्ण हो गयी है क्योंकि शीर्ष अदालत ने ग्रीष्मावकाश के दौरान इस पर विचार करने का निश्चय किया. उसने यहां तक सुझाव दिया कि वह शनिवार और रविवार को भी बैठ सकती है.

केंद्र ने कहा, तीन तलाक असंवैधानिक

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने कहा कि तीन तलाक असंवैधानिक है. कई देश इसे खत्म कर चुके हैं. सरकार लैंगिक समानता और महिलाओं की सम्मानित जिंदगी के लिए लड़ रही है. तीन तलाक इसके खिलाफ है. केंद्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल सोमवार को दलील पेश करेंगे.

बहु विवाह पर सुनवाई नहीं

दो दिन तीन तलाक विरोधी व दो दिन समर्थक बहस करेंगे. बाद में एक-एक दिन दूसरे की बात का जवाब देंगे. बहु विवाह पर विचार नहीं.

पीठ में पांच जज, सभी पुरुष

प्रधान न्यायाधीश जेएस खेहर की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों की पीठ में न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन, न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर शामिल हैं. इस पीठ में विभिन्न धार्मिक समुदायों -सिख, ईसाई, पारसी, हिंदू और मुसलिम- जज शामिल हैं और सभी पुरुष हैं.

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