''जल्लीकट्टू'' के बाद अब ‘भैंसा दौड़ कंबाला’ पर बिल, कर्नाटक विधानसभा ने लगाई मुहर

बेंगलुरु : कर्नाटक विधानसभा ने भैंसा दौड़ यानि कंबाला बिल को सोमवार को पास कर दिया है. गौर हो कि कंबाला खेल कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है. यह खेल पारंपरिक हैं जो भैंसा दौड़ पर आधारित है. इस खेल की पहचान उत्तरी कर्नाटक और कंबाला उडुपी-दक्षिणी कर्नाटक के पारंपरिक खेल […]
बेंगलुरु : कर्नाटक विधानसभा ने भैंसा दौड़ यानि कंबाला बिल को सोमवार को पास कर दिया है. गौर हो कि कंबाला खेल कर्नाटक के तटीय क्षेत्र में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है. यह खेल पारंपरिक हैं जो भैंसा दौड़ पर आधारित है. इस खेल की पहचान उत्तरी कर्नाटक और कंबाला उडुपी-दक्षिणी कर्नाटक के पारंपरिक खेल के तौर पर है.
उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु में जल्लीकट्टू आंदोलन को सफलता मिलने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ाते हुए छात्रों, कलाकारों और नेताओं ने विशाल प्रदर्शन किया था. यह प्रदर्शन ‘कंबाला’ पर से बैन हटाने की मांग को था जिसे आज सफलता मिली. प्रदर्शन के धीरे-धीरे होते व्यापक रुप को देखते हुए सरकार ने इस बिल को विधानसभा से पास कर दिया.
तमिलनाडु में ‘जलीक्टटू’ पर बैन हटने के बाद से ही कर्नाटक के तटीय इलाकों में खेले जाने वाले इस खेल पर भी प्रतिबंध हटाने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था. इस विरोध प्रदर्शन को देखते हुए राज्य सरकार ने पशु निर्दयता विरोधी कानून में संशोधन करने का फैसला किया , ताकि ये खेल दोबारा से राज्य में शुरू हो सके और लोगों की भावनायें परंपरा से जुड़ी रहे.
कंबाला को लेकर मांग तब और जोर पकड़ने लगा था, जब तमिलनाडु ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से जलीकट्टू पर लगाये गये बैन के खिलाफ विधानसभा में बिल पारित किया था.
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