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9,800 करोड़ रुपये के कालेधन का खुलासा करने वाले हैदराबाद के बिल्डर पर आयकर का छापा

Updated at : 07 Dec 2016 9:26 PM (IST)
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9,800 करोड़ रुपये के कालेधन का खुलासा करने वाले हैदराबाद के बिल्डर पर आयकर का छापा

हैदराबाद : केंद्र सरकार की ओर से कालेधन की निकासी के लिए देश में सितंबर तक चलायी गयी आय खुलासा योजना (आईडीएस) के तहत करीब 9,800 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा करने वाले रियल एस्टेट क्षेत्र के एक बिल्डर के यहां आयकर विभाग ने छापेमारी कर कार्रवाई की है. बिल्डर पर आरोप है […]

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हैदराबाद : केंद्र सरकार की ओर से कालेधन की निकासी के लिए देश में सितंबर तक चलायी गयी आय खुलासा योजना (आईडीएस) के तहत करीब 9,800 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा करने वाले रियल एस्टेट क्षेत्र के एक बिल्डर के यहां आयकर विभाग ने छापेमारी कर कार्रवाई की है. बिल्डर पर आरोप है कि उसने 30 नवंबर को इस योजना के तहत पहली किस्त का भुगतान नहीं किया है. इसके बाद ही आयकर विभाग ने छापेमारी की कार्रवाई की है.

कालेधन के खुलासे के लिए जारी किये गये आंकड़े में कमी आने का भय

रियल एस्टेट क्षेत्र के इस बिल्डर द्वारा डिफॉल्ट किये जाने से कर विभाग में खलबली मची है, क्योंकि उसकी घोषणा को 30 सितंबर को बंद हुई आईडीएस योजना के तहत वैध की श्रेणी में डाला गया था. अधिकारियों का कहना है कि इस घोषणा को अवैध करार किये जाने के बाद योजना के तहत घोषित राशि में काफी कमी आयेगी. हाल में आईडीएस के तहत घोषित राशि को पहले के 65,250 करोड़ रुपये से संशोधित कर 67,382 करोड़ रुपये किया गया था. ये घोषणाएं 71,726 लोगों ने की थीं. इनमें यह बिल्डर भी शामिल है.

1,100 करोड़ रुपये के जमा करानी थी पहली किस्त

सूत्रों ने कहा कि विभाग ने मंगलवार को छापेमारी की कार्रवाई शुरू की, जो बुधवार को भी जारी थी. बिल्डर को आय घोषणा योजना के तहत पहली किस्त में 1,100 करोड़ रुपये जमा कराने थे. विभाग इससे पहले दो घोषणाओं को खारिज किया था. इसमें मुंबई के एक परिवार द्वारा की गई दो लाख करोड़ रुपये की घोषणा के अलावा अहमदाबाद के कारोबारी द्वारा 13,860 करोड़ रुपये की घोषणा शामिल है. विभाग ने पहले ही ऐसी घोषणा करने वालों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है.

बिल्डर की घोषणा को माना गया था वैध

सूत्रों ने कहा कि अहमदाबाद और मुंबई की घोषणा को अंतिम आईडीएस गणना में शामिल नहीं किया गया था, लेकिन हैदराबाद के कारोबारी की घोषणा को वैध माना गया था. पहली किस्त में चूक के बाद कर अधिकारियों के सामने संबंधित बिल्डर के खिलाफ कर कानून के तहत कार्रवाई करने और उनके स्रोत की जानकारी प्राप्त करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

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