पानसरे हत्याकांड : जमानत पर सुनवाई टली, कोर्ट ने पूछा क्या हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंप दी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jun 2016 6:45 PM

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मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने आज महाराष्ट्र सरकार से जानना चाहा कि क्या उसने गोविन्द पानसरे हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया है जैसा कि मारे गए कार्यकर्ता के परिवार के वकील ने दावा किया है. वहीं, लोक अभियोजक ने कहा कि उन्हें अब तक इस तरह की कोई जानकारी नहीं […]

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मुंबई : बंबई उच्च न्यायालय ने आज महाराष्ट्र सरकार से जानना चाहा कि क्या उसने गोविन्द पानसरे हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया है जैसा कि मारे गए कार्यकर्ता के परिवार के वकील ने दावा किया है. वहीं, लोक अभियोजक ने कहा कि उन्हें अब तक इस तरह की कोई जानकारी नहीं मिली है.उच्च न्यायालय ने पानसरे और तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की हत्याओं की जांच में धीमी प्रगति पर क्रमश: सीआईडी और सीबीआई की जबर्दस्त खिंचाई की.

मारे गए कम्युनिस्ट नेता के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अभय नेवगी ने न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति शालिनी फंसालकर की पीठ को सूचित किया कि पानसरे के परिवार ने मामले में सीबीआई जांच के लिए महाराष्ट्र सरकार से संपर्क किया था और कल राज्य सरकार इस पर सहमत हो गई.हालांकि, लोक अभियोजक संदीप शिन्दे ने अदालत को बताया कि उन्हें इस संबंध में सरकार की ओर से कोई जानकारी नहीं मिली है.
इस पर, उच्च न्यायालय ने शिन्दे को निर्देश दिया कि वह पता लगाएं कि क्या सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है, और यदि उसने ऐसा किया है तो अदालत को इसके पीछे का कारण बताया जाए. बाद में, पीठ ने मामले की सुनवाई को छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया. पीठ दाभोलकर और पानसरे के परिवारों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जिनमें दोनों हत्याओं के मामले की जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में करने का आग्रह किया गया है.
उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘अब सीबीआई ने नरेंद्र दाभालेकर हत्या मामले में किसी को गिरफ्तार किया है, पानसरे का परिवार भी अपने मामले में सीबीआई जांच चाहता है और राज्य सरकार तुरत-फुरत कह रही है कि ठीक है होने दीजिए…इसे मेरे कंधे से जाने दीजिए…एक सिरदर्द चला गया.” सीबीआई ने दाभोलकर की हत्या के मामले में हाल में सनातन संस्था के कार्यकर्ता वीरेंद्र तावडे को नवी मुंबई से गिरफ्तार किया था.
दाभोलकर की हत्या अगस्त 2013 में हुई थी और पानसरे की हत्या 16 फरवरी 2015 को कोल्हापुर में गोली मारकर कर दी गई थी. सीबीआई और सीआईडी उच्च न्यायालय में समय…समय पर प्रगति रिपोर्ट सौंप रही हैं.सीबीआई ने पूर्व में कहा था कि वह हत्या के मामले में दक्षिणपंथी संगठन सनातन संस्था की भूमिका की जांच कर रही है.
दोनों हत्याओं के मामलों में सीबीआई और सीआईडी द्वारा सौंपी गई प्रगति रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद उच्च न्यायालय ने कहा कि वह जांच की गति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है.अदालत ने कहा, ‘‘हम इन रिपोर्टों से प्रभावित नहीं हैं. एजेंसियों को सचेत और संवेदनशील रहना चाहिए क्योंकि हत्या के मामलों की जांच यह ध्यान में रखकर की जानी चाहिए कि यह समाज के विरद्ध अपराध है. दो जाने…माने लोगों की जांच उनके काम और विचारधारा की वजह से चली गई, इसलिए यहां अभिव्यक्ति और विचारों की स्वतंत्रता का व्यापक हित दांव पर है.” मामले को छह सप्ताह के लिए स्थगित करते हुए उच्च न्यायालय ने सीबीआई से कहा कि वह स्कॉटलैंड के फॉरेंसिक साइंस लैब से तत्काल रिपोर्ट हासिल करने के लिए हरसंभव कदम उठाए, जहां एजेंसी ने मारे गए एक अन्य तर्कशास्त्री एम एम कलबुर्गी के शरीर से बरामद गोलियों और खाली कारतूसों को भेजा है.
पीठ ने कहा, ‘‘कार्यवाही को तेज कीजिए और रिपोर्ट तत्काल हासिल करने की कोशिश करें.” अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि एक महीने से दोनों एजेंसियां जांच में अपने पैर घसीट रही हैं, जिसे इसने बहुत ही ‘‘बचकाना ” बताया. लोक अभियोजक शिन्दे ने अदालत को सूचित किया कि सीआईडी ने दाभोलकर हत्या मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए एक व्यक्ति की हिरासत मांगी है.
इस पर अदालत ने कहा, ‘‘क्या आप इस व्यक्ति के बारे में पहले नहीं जानते थे और उस संगठन को नहीं जानते थे जिससे वह जुडा है. यह बहुत ही शर्मनाक है कि अधिकारी जांच के बजाय परिजनों से पूछते हैं कि उन्हें किस पर शक है.” उच्च न्यायालय ने जांच से संबंधित ब्योरे का मीडिया में खुलासा करने पर सीबीआई की भी खिंचाई की.
अदालत ने कहा, ‘‘आपकी (सीबीआई) प्रगति रिपोर्ट खबर रिपोर्टों के सिवाय कुछ भी नहीं है. यह सब पहले से ही सबको पता है. मीडिया को मामले में गवाह की पहचान और इस बारे में कैसे पता लग गया कि एजेंसी कहां छापे मारने जा रही है. हर चीज का खुलासा मीडिया को कर दिया गया.” उच्च न्यायालय ने तंज कसते हुए कहा, ‘‘यदि आप इस तरह जांच करेंगे तो आप समूची जांच को बर्बाद कर देंगे. फरार ओरापियों को भी मीडिया से जांच से संबंधित ब्योरा मिल रहा होगा. सीबीआई को सलाम.”
अदालत ने कहा, ‘‘अभी यह सब छोटी बात लग सकती है, लेकिन वे महत्वपूर्ण खामियां हैं जब मुकमदमा चल रहा है. कल गवाहों और परिवार के सदस्यों को कौन बचाएगा जो इन दिनों मीडिया से खुलकर बात कर रहे हैं. परिवार के सदस्यों को कुछ संयम और धैर्य बरतना चाहिए. हर चीज के लिए यह सस्ती लोकप्रियता घृणित है और यह निष्पक्ष जांच तथा मुकदमे को प्रभावित करती है.” इसने चेतावनी दी कि वह मीडिया को जांच के ब्योरे का खुलासा कर रहे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उन्हें जेल भेजने में नहीं हिचकेगी. मामले को अब छह सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया है, तब तक जांच एजेंसियों को प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होंगी.
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