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विशेष अदालत ने सीबीआई को पूर्व रॉ प्रमुख की संपत्ति की जांच का दिया आदेश

Updated at : 30 May 2016 3:45 PM (IST)
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विशेष अदालत ने सीबीआई को पूर्व रॉ प्रमुख की संपत्ति की जांच का दिया आदेश

नयी दिल्ली : सीबीआई की विशेष अदालत ने जांच एजेंसी को देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ ) के एक पूर्व सचिव द्वारा ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच का निर्देश दिया है. तीस हजारी विशेष अदालत द्वारा 18 फरवरी 2013 को सीबीआई को ए के […]

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नयी दिल्ली : सीबीआई की विशेष अदालत ने जांच एजेंसी को देश की प्रमुख खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ ) के एक पूर्व सचिव द्वारा ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोपों की जांच का निर्देश दिया है. तीस हजारी विशेष अदालत द्वारा 18 फरवरी 2013 को सीबीआई को ए के वर्मा की संपत्ति की जांच के संबंध में दिए गए आदेश को सीबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और इसे रद्द कर दिया गया था.

वर्मा उस समय रॉ के प्रमुख थे. विशेष न्यायाधीश ब्रिजेश कुमार गर्ग ने अपने आदेश में कहा, ‘‘ इसके बाद शिकायतकर्ता ( पूर्व रॉ कर्मचारी आर के यादव ) ने विभिन्न धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों के लिए मुकदमे का सामना करने के लिए आरोपी व्यक्तियों को समन जारी किए जाने की अपील की. उन्होंने कहा कि यादव ने सात सितंबर 2010 को अदालत द्वारा जारी आदेशों की अनुपालना में अपनी शिकायतों के सिलसिले में 13 गवाहों से पूछताछ की थी. उन्होंने कहा, ‘‘ इन गवाहों ने आरोपी व्यक्तियों की चल अचल संपत्ति के संबंध में विभिन्न दस्तावेज रिकार्ड पर रखे थे.
लेकिन शिकायतकर्ता आरोपी नंबर एक यानी तत्कालीन रॉ प्रमुख के कार्यकाल में कथित रुप से अर्जित की गयी चल अचल संपत्ति के संबंध में ठोस सबूत पेश करने में विफल रहे थे.’ जज ने मौजूदा मामले में भी इस बात को रेखांकित किया कि आरोपी व्यक्ति नोएडा के निवासी हैं जो इस अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
जज ने कहा, ‘‘ इससे भी आगे की बात यह है कि शिकायतकर्ता के समन से पूर्व आरोपी नंबर एक के कार्यकाल के दौरान कथित रुप से आरोपियों द्वारा बडे पैमाने पर अर्जित की गयी चल अचल संपत्ति के संबंध में रिकार्ड में अपूर्ण दस्तावेज आए हैं.’ उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए जज ने सीबीआई के निदेशक को ‘‘जांच के रुप में खोजबीन’ करने को कहा, जज ने कहा कि जांच अधिकारी पुलिस अधीक्षक से नीचे के रैंक का नहीं होना चाहिए और वह तीन महीने के भीतर अदालत को रिपोर्ट सौंपे.
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