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नये साल में कांग्रेस को द्रमुक व माकपा से मिल सकता है दोस्ती का तोहफा

Updated at : 29 Dec 2015 1:49 PM (IST)
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नये साल में कांग्रेस को द्रमुक व माकपा से मिल सकता है दोस्ती का तोहफा

नयी दिल्ली : नये साल में कांग्रेस को दो नये दोस्तों की सौगात मिल सकती है. तमिलनाडु में डीएमके से उसका गंठबंधन हो सकता है. आज डीएमके प्रमुख के करुणानिधि ने ऐसे संकेत दिये हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल में माकपा भी आने वाले दिनों में कांग्रेस से गंठबंधन की संभावनाएं टटोलेगी. इन दो बड़े राज्यों […]

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नयी दिल्ली :
नये साल में कांग्रेस को दो नये दोस्तों की सौगात मिल सकती है. तमिलनाडु में डीएमके से उसका गंठबंधन हो सकता है. आज डीएमके प्रमुख के करुणानिधि ने ऐसे संकेत दिये हैं. वहीं, पश्चिम बंगाल में माकपा भी आने वाले दिनों में कांग्रेस से गंठबंधन की संभावनाएं टटोलेगी. इन दो बड़े राज्यों में 2016 में विधानसभा चुनाव होना है.


जनवरी में माकपा राज्य समिति करेगी चर्चा


हाल ही में 36 सालों में पहली बार माकपा ने कोलकाता में अपना पहला पूर्ण अधिवेशन किया. इस अधिवेशन के दौरान पार्टी के दिग्गज नेताओं ने एक रैली भी कि और ऐलान किया कि वे 2016 में बंगाल में ममता बनर्जी सरकार को हटा कर सत्ता में वापसी करेंगे. बाद में प्रेस की ओर से माकपा महासचिव सीताराम येचुरी से सवाल पूछा गया कि अगर ऐसी स्थिति हो कि कांग्रेस से गंठबंधन के अलावा कोई रास्ता नहीं रहे, तो पार्टी क्या करेगी, इस येचुरी ने कहा कि तब विचार किया जायेगा. माकपा की बंगाल यूनिट में एक धड़ा तृणमूल को मात देने के लिए कांग्रेस से गंठबंधन के पक्ष में है, जबकि दूसरा धड़ा ऐसा नहीं चाहता. सूत्रों के अनुसार, इस बिंदु पर जनवरी में चर्चा होगी.

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तमिलनाडु के हालात


कांग्रेस से गंठबंधन तोड़ चुके द्रमुक ने कांग्रेस को फिर से गंठबंधन का न्योता दिया है. दोस्ती का यह हाथ द्रमुक प्रमुख एम करुणानिधि ने खुद बढ़ाया है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, हम गंठबंधन पार्टियों का न्योता देते समय कांग्रेस को बाहर नहीं रखेंगे. उनसे पत्रकारों ने पूछा था कि क्या वे कांग्रेस को गंठबंधन में शामिल होने का न्योता देंगे. करुणानिधि ने हाल में यह भी कहा था कि द्रमुक डीएमडीके चीफ विजयकांत को भी गंठबंधन में शामिल होने का न्योता देगी.

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बिहार फार्मूले पर अमल


2016 में तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम में विधानसभा चुनाव होने हैं और फिर 2017 में उत्तरप्रदेश व पंजाब जैसे प्रमुख राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है. पिछले दिनों पंजाब से खबर आयी कि वहां कांग्रेस की कमान संभाल चुके अमरिंदर सिंह राज्य के छाेटे दलों से गंठबंधन की संभावनाएं टटोल रहे हैं. वहां कांग्रेस बड़ी पार्टनर है, जबकि तमिलनाडु व बंगाल मेंकांग्रेस जूनियरपार्टनर ही हो सकती है. अगर इस रूप में भी वह सत्ता में आती है, तो 2019 के आम चुनाव में उसके लिए राहें तुलनात्मक रूप से अधिक आसान होंगी. इन्हीं सहयोगियों के दम पर कांग्रेस ने केंद्र में यूपीए वन व यूपीए टू की सरकारें चलायी थी.

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