जारवा जनजाति की सुरक्षा नयी निगरानी प्रणाली के हाथ में
Author Prabhat khabar digital desk
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कोलकाता: जारवा आदिम जनजाति के संरक्षित क्षेत्र में फ्रांसीसी फिल्म निर्माताओं को घुसते पाए जाने के एक महीने बाद अंडमान निकोबार प्रशासन ने इलाके में निगरानी प्रणाली को बेहतर बनाने का फैसला किया है. अधिकारियों ने आज बताया कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) ए.के. सिंह ने रिजर्व क्षेत्र में […]
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कोलकाता: जारवा आदिम जनजाति के संरक्षित क्षेत्र में फ्रांसीसी फिल्म निर्माताओं को घुसते पाए जाने के एक महीने बाद अंडमान निकोबार प्रशासन ने इलाके में निगरानी प्रणाली को बेहतर बनाने का फैसला किया है.
अधिकारियों ने आज बताया कि अंडमान निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) ए.के. सिंह ने रिजर्व क्षेत्र में गश्त बढाने के लिए एक नये ‘मल्टी टास्क फोर्स’ के गठन का आदेश दिया है.200 किलोमीटर लंबी तटरेखा की हिफाजत मजबूत त्रिस्तरीय संयुक्त कार्रवाई टीम करेगी.
बाहरी घेरे में नौसेना और तट रक्षक के अधिकारी मौजूद होंगे जबकि मध्य घेरे में पुलिस मरीन बल के ‘इंटरसेप्टर पोत’ होंगे. वहीं, अंदरुनी घेरे में पुलिसकर्मी, वनकर्मी और अंडमान आदिम जनजाति विकास समिति के सदस्य निगरानी करेंगे.
अंडमान निकोबार आदिवासी कल्याण सचिव तेवा नीती दास ने पोर्ट ब्लेयर से बताया, ‘‘कम से कम चार नौकाएं होंगी जिनमें प्रत्येक पर छह छह लोग होंगे.’’ उन्होंने यह भी बताया कि करीब 1000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले जारवा भूक्षेत्र में निगरानी बढाने के लिए एक मल्टी टास्क फोर्स नियुक्त किया गया है.
अधिकारी ने बताया कि चार टीमें होंगी जिनमें प्रत्येक में स्वास्थ्य एवं वन विभाग के तीन तीन अधिकारी होंगे. उनका काम इलाके का समय समय पर दौरा करना और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी व्यक्ति जारवा क्षेत्र में नहीं घुस पाए और उसके अंदर कोई समस्या खडी नहीं करे. एक अन्य टीम जारवा आदिम जनजाति के पास स्थित होटल, रेस्तरां, दुकानों में बाहरी लोगों की मौजूदगी पर नजर रखेगी.
अंडमान ट्रंक रोड के बारे में पूछे जाने पर दास ने बताया कि यह अत्यधिक नियंत्रण में है क्योंकि सभी वाहन पुलिस काफिले के साथ वहां भेजे जाते हैं ताकि कोई घुसपैठ नहीं हो सके. यह मार्ग जारवा क्षेत्र से गुजरता है.उन्होंने कहा, ‘‘निगरानी टीमों की कार्रवाई पर नजर रखने के लिए हमारे पास निगरानी समितियां होंगी..इनमें एक केंद्र शासित प्रदेश स्तर पर होगी जबकि दूसरी जिला स्तर पर होगी. आईजी स्तर के एक अधिकारी संयुक्त कार्रवाई टीम के कमांडर होंगे.’’ गौरतलब है कि दो फ्रांसीसी फिल्मनिर्माता जारवा इलाके में घुसपैठ कर गए थे जिसके बाद यह कार्रवाई की गई है.
वहां इन लोगों ने फरवरी में चोरी छिपे एक वृत्तचित्र बनाया था. यह मामला पिछले महीने प्रकाश में आया.जारवा जनजाति से किसी तरह का संपर्क करना, उनकी तस्वीर खींचना या उनका वीडियो बनाना गैर कानूनी है और ऐसा करने वालों को सात साल तक की सख्त सजा हो सकती है.
शेष मानव प्रजाति से अलग थलग रहने के चलते उनमें फ्लू और खसरा जैसी आम बीमारियों के लिए प्रतिरोध नहीं है तथा किसी महामारी से उनका पूरी तरह से सफाया हो जाने की आशंका काफी अधिक है. द्वीप समूह में जारवा चार बडी आदिम जनजातियों में शामिल हैं. अन्य के नाम गेट्र अंडमानी, ओंगे और सेंटीनेलीज हैं. माना जाता है कि वे हिंद महासागर स्थित अपने इस अधिवास में 55,000 साल से रह रहे हैं.
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