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बांग्लादेश ने NRC को बताया भारत का आंतरिक मसला तो वहीं अमेरिका में हुआ CAA का विरोध

Updated at : 29 Dec 2019 1:30 PM (IST)
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बांग्लादेश ने NRC को बताया भारत का आंतरिक मसला तो वहीं अमेरिका में हुआ CAA का विरोध

नयी दिल्ली: बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) के प्रमुख ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह भारत सरकार का आंतरिक मामला है और दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय है. एनआरसी भारत का आंतरिक मामला बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम ने यहां […]

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नयी दिल्ली: बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) के प्रमुख ने रविवार को कहा कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह भारत सरकार का आंतरिक मामला है और दोनों देशों के सीमा सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय है.

एनआरसी भारत का आंतरिक मामला

बीजीबी के महानिदेशक मेजर जनरल शफीनुल इस्लाम ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि बल भारत में अवैध लोगों के प्रवेश को रोकना जारी रखेगा. सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बताया कि इस्लाम की अगुवाई में बीजीबी का एक शिष्टमंडल अपने समकक्षों से महानिदेशक स्तर की सीमा वार्ता के भारत के दौरे पर है. एनआरसी मुद्दे पर टिप्पणी मांगे जाने पर उन्होंने कहा, यह पूरी तरह भारत सरकार का आंतरिक मामला है.

वाशिंगटन में हुआ सीएए का विरोध

वहीं भारतीय-अमेरिकियों का एक समूह संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए यहां भारतीय दूतावास के सामने स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास एकत्रित हुआ.‘नफरत के खिलाफ एकजुट’ और ‘भारत को बांटना बंद करो’ जैसे पोस्टर प्रदर्शित करते हुए ग्रेटर वाशिंगटन इलाके के करीब 150 भारतीय-अमेरिकियों ने शनिवार को आरोप लगाया कि भारत का धर्मनिरपेक्ष ढांचा खतरे में है.

उन्होंने भाजपा नीत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और राष्ट्रगान गाया. प्रदर्शनकारियों ने गांधी की प्रतिमा के इर्द गिर्द घेरा बनाया और देशभक्ति गीत गाए. साथ ही नागरिकता देने में धर्म को आधार बनाए जाने के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई. पिछले नौ दिनों में भारतीय दूतावास के सामने किया गया यह तीसरा विरोध प्रदर्शन था.

संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के मुताबिक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और इसाई समुदाय के जो लोग धार्मिक प्रताड़ना के चलते पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर, 2014 तक भारत आ गए हैं, उन्हें भारतीय नागरिकता दी जाएगी.

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