बीएचयू: प्रो. फिरोज खान का विरोध कर रहे छात्रों ने खत्म किया हड़ताल, वीसी ने दिया आश्वासन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Nov 2019 10:42 AM
वाराणसी: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे छात्रों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है. जानकारी के मुताबिक कुलपति राकेश भटनागर से वार्ता करने के बाद हड़ताली छात्रों ने शुक्रवार को होने वाली परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया है. […]
वाराणसी: बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय में मुस्लिम प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे छात्रों ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया है. जानकारी के मुताबिक कुलपति राकेश भटनागर से वार्ता करने के बाद हड़ताली छात्रों ने शुक्रवार को होने वाली परीक्षा में शामिल होने का फैसला किया है. राकेश भटनागर ने छात्रों को आश्वासन दिया है कि उनकी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए दस दिन में कोई सुधारात्मक कदम उठाया जाएगा.
‘हमारी आपत्ति नियुक्ति को लेकर नहीं है’
संस्कृत धर्म विज्ञान संकाय के छात्र पीएचडी स्कॉलर चक्रपाणि ओझा की अगुवाई में बीते 7 नवंबर से कुलपति आवास के बाहर धरना दे रहे थे. वे संस्कृत धर्म विज्ञान संस्थान में जयपुर निवासी फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक हड़ताली छात्रों का कहना है कि ‘उनकी आपत्ति फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर नहीं है’.
छात्रों का कहना है कि ‘प्रोफेसर फिरोज खान संस्कृत भाषा या भाषा विज्ञान पढ़ाएं तो कोई दिक्कत नहीं है. उनकी आपत्ति एक मुस्लिम प्रोफेसर द्वारा सनातन हिन्दू कर्मकांड और पूजा पद्दति पढ़ाए जाने को लेकर है’. हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि फिरोज खान की नियुक्ति तय मानकों के अनुरूप ही हुुई है और इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गयी है.
छात्र प्रोफेसर फिरोज खान के सपोर्ट में
हालांकि विश्वविद्यालय के अन्य छात्र और फैकल्टी मेंबर्स फिरोज खान के समर्थन में हैं. समर्थन में छात्रों के एक समूह ने विश्वविद्यालय कैंपस में बुधवार की दोपहर और गुरूवार की शाम को रैली का आयोजन भी किया था. समर्थन कर रहे लोगों का कहना है कि ‘किसी भाषा को धर्म से जोड़ कर देखना गलत है. साथ ही किसी को मौका दिए बिना कह देना कि फलां व्यक्ति उस विषय को कैसे पढ़ा पाएगा, बेमानी है’.
अधिकांश छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स का कहना है कि ‘हमारा संविधान किसी भी शैक्षणिक संस्थान में धार्मिक आधार पर भेदभाव का विरोध करता है. इनका कहना है कि फिरोज खान को एक बार पढ़ाने का मौका देना चाहिए. उससे पहले किसी भी नतीजे पर पहुंचना न्यायोचित नहीं कहा जाएगा’.
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