गुड आइडिया : स्कूलों में हो रहा वाटर ब्रेक, तीन बार बज रही घंटी

Updated at : 16 Nov 2019 6:08 AM (IST)
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गुड आइडिया : स्कूलों में हो रहा वाटर ब्रेक, तीन बार बज रही घंटी

केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के स्कूलों में बच्चों को पानी पीने के लिए किया जा रहा प्रेरित केरल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पानी पिलाने के लिए वाटर ब्रेक दिया जा रहा है. इतना ही नहीं, इसके लिए घंटियां भी बजायी जा रही है. वहां इसे वॉटर बेल का नाम दिया गया है. घंटी […]

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केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के स्कूलों में बच्चों को पानी पीने के लिए किया जा रहा प्रेरित
केरल के सरकारी स्कूलों में बच्चों को पानी पिलाने के लिए वाटर ब्रेक दिया जा रहा है. इतना ही नहीं, इसके लिए घंटियां भी बजायी जा रही है. वहां इसे वॉटर बेल का नाम दिया गया है. घंटी बजने पर स्कूल में सभी बच्चों को पानी पीना होता है, जितनी भी उन्हें प्यास हो. स्कूलों में दिनभर में तीन बार वाटर बेल बजायी जाती है. पहली घंटी सुबह 10.35 बजे बजती है.
दूसरी घंटी दोपहर 12 बजे और तीसरी घंटी दोपहर 2 बजे बजायी जाती है. यह वॉटर ब्रेक 15 से 20 मिनट का होता है. रिपोर्ट के मुताबिक, पानी की कमी और डिहाइड्रेशन से कई बच्चे बीमार पड़ते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि खास तौर पर लड़कियां समय पर जरूरी मात्रा में पानी नहीं पीतीं. हालांकि, लड़कियों के पानी नहीं पीने का एक बड़ा कारण स्कूलों में स्वच्छ शौचालयों की कमी भी है.
डॉक्टरों ने बताया कि पानी की कमी से बच्चों को कई तरह की बीमारियों का खतरा रहता है. इसे दूर करने के लिए केरल के कई सरकारी स्कूलों में अब तक बच्चों को पानी पिलाने का यह अनोखा तरीका लागू किया जा चुका है. अब तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार अपने पड़ोसी राज्य के तरीके को अपनाने जा रही है.
कर्नाटक के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने इस संबंध में प्रशासन को आवश्यक निर्देश भी दे दिये हैं. दक्षिण कर्नाटक के स्कूलों में अब छात्रों को पानी पीने के लिए दिन में तीन बार 30-30 मिनट के वॉटर ब्रेक दिये जा रहे है. तमिलनाडु में #रिंगदबेलफॉरवॉटर कैंपेन की भी शुरुआत हो चुकी है. कई स्कूलों की इसमें भागीदारी देखी जा रही है.
शौचालय की कमी के कारण लड़कियां नहीं पीतीं पानी
देश में 38 हजार से अधिक स्कूलोंमें लड़कियों के लिए टॉयलेट नहीं
असम 11839
बिहार 8361
मध्यप्रदेश 4914
मेघालय 2314
पश्चिम बंगाल 1521
ओड़िशा 1238
महाराष्ट्र 1063
जम्मू-कश्मीर 911
झारखंड 866
बच्चे बोले- टॉयलेट नहीं जाने को मिलता, नहीं पीते पानी
एक सर्वे के मुताबिक, बच्चों के पानी नहीं पीने का सबसे बड़ा कारण उन्हें टॉयलेट नहीं जाने दिया जाना है. 72% बच्चों ने बताया कि वे क्लास में पानी नहीं पीते, क्योंकि टीचर ऐसा नहीं करने देती. साथ ही, टॉयलेट जाने की परमिशन भी नहीं दी जाती. 79% शिक्षकों ने माना कि वे बच्चों को क्लास में पानी पीने नहीं देते क्योंकि बच्चे बार-बार टॉयलेट जाने की इजाजत मांगते हैं, इससे क्लास डिस्टर्ब होता है.
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