इन पांच निष्कर्षों पर केंद्रित है फैसला

Updated at : 10 Nov 2019 1:50 AM (IST)
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इन पांच निष्कर्षों पर केंद्रित है फैसला

हाइकोर्ट का फैसला तार्किक नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 16 दिसंबर, 1949 तक नमाज पढ़ी गयी थी. सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान के टाइटल सूट में हमें संतुलन बनाना होगा. हाइकोर्ट ने जो तीन पक्ष माने थे, उसे दो हिस्सों में मानना होगा. हाइकोर्ट द्वारा जमीन को तीन हिस्सों में बांटना तार्किक नहीं […]

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हाइकोर्ट का फैसला तार्किक नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 16 दिसंबर, 1949 तक नमाज पढ़ी गयी थी. सुन्नी वक्फ बोर्ड और रामलला विराजमान के टाइटल सूट में हमें संतुलन बनाना होगा. हाइकोर्ट ने जो तीन पक्ष माने थे, उसे दो हिस्सों में मानना होगा. हाइकोर्ट द्वारा जमीन को तीन हिस्सों में बांटना तार्किक नहीं था. इससे साफ हो गया कि मामले में अब रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड दो पक्ष ही रह गये
अयोध्या में राम जन्मस्थान के दावे का विरोध नहीं
कोर्ट ने कहा कि एएसआइ नहीं साबित कर पाया कि मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनी थी. हालांकि अयोध्या में राम के जन्मस्थान के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया. विवादित जगह पर हिंदू पूजा किया करते थे. गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन से हिंदू दावा गलत साबित नहीं हुआ. हिंदू मुख्य गुंबद को ही राम के जन्म का सही स्थान मानते हैं. कोर्ट ने कहा कि रामलला ने ऐतिहासिक ग्रंथों के विवरण रखे.
1856 से पहले अंदरूनी हिस्से में हिंदू भी पूजा किया करते थे
सुप्रीम कोर्ट में सुन्नी पक्ष ने विवादित जगह को मस्जिद घोषित करने की मांग की. कहा कि वहां लगातार नमाज पढ़ी जाती रही थी. कोर्ट ने कहा कि 1856-57 तक विवादित स्थल पर नमाज पढ़ने के सबूत नहीं हैं. 1856 से पहले हिंदू भी पूजा करते थे. रोकने पर बाहर चबूतरे पर पूजा करने लगे. अंग्रेजों ने दोनों हिस्से अलग रखने के लिए रेलिंग बनायी. फिर भी हिंदू मुख्य गुंबद के नीचे ही गर्भगृह मानते थे.
मस्जिद खाली जगह पर नहीं बनी थी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुरातत्व की खुदाई से निकले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते. बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनी थी. मस्जिद के नीचे विशाल संरचना थी. एएसआइ ने 12वीं सदी का मंदिर बताया था. वहां से जो कलाकृतियां मिली थीं, वह इस्लामिक नहीं थीं. ढांचे में पुरानी संरचना की चीजें इस्तेमाल की गयी थीं. मुस्लिम पक्ष ने कहा कि रिपोर्ट पर भरोसा नहीं करना चाहिए.
अयोध्या में राम जन्मस्थान के दावे का विरोध नहीं
कोर्ट ने कहा कि एएसआइ नहीं साबित कर पाया कि मंदिर को तोड़ कर मस्जिद बनी थी. हालांकि अयोध्या में राम के जन्मस्थान के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया. विवादित जगह पर हिंदू पूजा किया करते थे. गवाहों के क्रॉस एग्जामिनेशन से हिंदू दावा गलत साबित नहीं हुआ. हिंदू मुख्य गुंबद को ही राम के जन्म का सही स्थान मानते हैं. कोर्ट ने कहा कि रामलला ने ऐतिहासिक ग्रंथों के विवरण रखे.
निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले की शुरुआत में ही हिंदू पक्ष निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया. हाइकोर्ट ने इस पक्ष को एक तिहाई हिस्सा दिया था. रामलला को कोर्ट ने मुख्य पक्षकार माना. निर्मोही अखाड़ा सेवादार भी नहीं है. शीर्ष अदालत ने रामलला को कानूनी मान्यता दी.
कैसे बने राम मंदिर, कोर्ट ने बताया रोडमैप
नयी दिल्ली. अयोध्या विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए विवादित स्थल पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया. कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने में बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का गठन कर विवादित स्थान को मंदिर निर्माण के लिए देने को कहा.
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि केंद्र सरकार सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन दे. सुप्रीम कोर्ट ने निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया, लेकिन केंद्र को आदेश दिया कि मंदिर निर्माण के लिए बनने वाले बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाये. मंदिर निर्माण कैसे होगा, यह बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज तय करेगा.
सोमनाथ मंदिर के लिए भी बनाया गया था ट्रस्ट :
अयोध्या में मंदिर का निर्माण बिल्कुल गुजरात के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर होगा. सोमनाथ के लिए भी केंद्र ने ट्रस्ट का गठन किया था. सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर का फिर से निर्माण कराया था. उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद भी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल हुए थे.
पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया था. सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला माना जाता है. अरब यात्री अल बरूनी ने यात्रा वृतांत में विवरण लिखा है. इससे प्रभावित होकर गजनवी ने 1025 में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, संपत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया.
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