उद्धव ने फडणवीस के बयान पर जतायी नाराजगी, भाजपा यूज एंड थ्रो की पॉलिसी पर चल रही

मुंबई : शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस बयान पर बृहस्पतिवार को निराशा जतायी कि भाजपा ने महाराष्ट्र में सत्ता की साझेदारी के लिए ‘50:50′ फॉर्मूले का वादा नहीं किया था. शिवसेना विधायकों ने यहां पार्टी मुख्यालय में बैठक की और एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना. सूत्रों ने […]
मुंबई : शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के इस बयान पर बृहस्पतिवार को निराशा जतायी कि भाजपा ने महाराष्ट्र में सत्ता की साझेदारी के लिए ‘50:50′ फॉर्मूले का वादा नहीं किया था.
शिवसेना विधायकों ने यहां पार्टी मुख्यालय में बैठक की और एकनाथ शिंदे को विधायक दल का नेता चुना. सूत्रों ने बताया कि बैठक में मौजूद रहे शिवसेना प्रमुख ने फडणवीस के इस बयान पर निराशा जतायी कि शिवसेना से किसी ‘50:50′ फॉर्मूले का वादा नहीं किया गया था. उन्होंने बताया कि ठाकरे ने इस बात पर भी जोर दिया कि वह 2014 की व्यवस्था के मुकाबले इस बार गठबंधन सरकार में बड़ी हिस्सेदारी चाहते हैं. सूत्रों के अनुसार शिवसेना प्रमुख ने अपनी पार्टी के विधायकों को यह भी बताया कि भाजपा ने अभी तक सरकार गठन के लिए सत्ता बंटवारे के किसी फॉर्मूले की पेशकश नहीं की है. दोनों भगवा सहयोगी दल 24 अक्तूबर को घोषित हुए चुनाव नतीजों में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद सत्ता बंटवारे पर कोई व्यवस्था नहीं बना पाये हैं.
दूसरी ओर शिवसेना ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर अपना दावा नहीं छोड़ने का संकेत देते हुए कहा कि सत्ता के समान बंटवारे का मतलब निश्चित रूप से शीर्ष पद की साझेदारी भी है. पार्टी ने सख्त लहजे में भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी अपने गठबंधन साझेदारों के साथ ‘इस्तेमाल करो और छोड़ दो’ की नीति अपना रही है. भाजपा और शिवसेना गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है, हालांकि सत्ता के बंटवारे पर सहमति नहीं बन पाने के चलते नयी सरकार के गठन को लेकर गतिरोध बना हुआ है. शिवसेना के मुखपत्र सामना के एक संपादकीय में कहा गया है कि लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच गठबंधन होने के समय जो तय हुआ था, उसे लागू करना चाहिए.
इसमें कहा गया, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने उस संवाददाता सम्मेलन (दोनों दलों द्वारा गठबंधन करने के बाद आयोजित) में कहा था कि सभी सरकारी पद समान रूप से साझा किये जायेंगे. शिवसेना ने कहा, अगर मुख्यमंत्री का पद इसके तहत नहीं आता है तो हमें राजनीतिक विज्ञान का पाठ्यक्रम दोबारा लिखने की जरूरत है. संपादकीय में लिखा गया है, 2014 के लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने के बाद भाजपा ने शिवसेना से राह अलग कर ली और पार्टी ‘इस्तेमाल करो और छोड़ दो’ के आधार पर चलना चाहती है. इसमें कहा गया है, लेकिन हम आसानी से खत्म नहीं होंगे क्योंकि हमारे पास जनता का समर्थन है.
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