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कर्जमाफी पर घिर सकती है कांग्रेस, ‘कमल’ के सामने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे ‘नाथ’

Updated at : 09 May 2019 6:32 AM (IST)
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कर्जमाफी पर घिर सकती है कांग्रेस, ‘कमल’ के सामने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे ‘नाथ’

भाजपा नेताओं को भरोसा, मोदी की वापसी पर प्रदेश सरकार की विदाई तय 29 में से 13 सीटों पर हो चुका है चुनाव, 16 पर बाकी भोपाल : मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 13 पर चुनाव हो चुके हैं. शेष 16 सीटों पर अगले दो फेज में चुनाव होने बाकी हैं. मध्य […]

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भाजपा नेताओं को भरोसा, मोदी की वापसी पर प्रदेश सरकार की विदाई तय
29 में से 13 सीटों पर हो चुका है चुनाव, 16 पर बाकी
भोपाल : मध्य प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 13 पर चुनाव हो चुके हैं. शेष 16 सीटों पर अगले दो फेज में चुनाव होने बाकी हैं. मध्य प्रदेश में हाल में ही राज्य की सत्ता में परिवर्तन आया है.
राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा से कांग्रेस ने प्रदेश की सत्ता छीनी है. विधानसभा चुनाव को भाजपा और कांग्रेस के लिए लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा था, जिसमें कांग्रेस से भाजपा को शिकस्त दी थी. अब लोकसभा चुनाव को कांग्रेस की प्रदेश सरकार का भविष्य माना जा रहा है. भाजपा का एक बड़ा तबका यह मान रहा है कि केंद्र में मोदी की वापसी को प्रदेश की कांग्रेस सरकार की विदाई भी बता रहा है.
दरअसल, पिछले दिनों भाजपा के बड़े नेता और मोदी सरकार में मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने खजुराहो में लोगों से कहा, जनता के सामने एक वोट से दो सरकारें चुनने का मौका है. परोक्ष रूप से तोमर कह रहे थे कि नरेंद्र मोदी को दोबारा चुनोगे, तो मध्य प्रदेश में भी भाजपा लौट आयेगी और कमलनाथ विदा कर दिये जायेंगे.
इस बार आम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही खासे दबाव में हैं, लेकिन प्रदेश की तस्वीर कुछ अलग है. खासकर कांग्रेस या कहें कि मुख्यमंत्री कमलनाथ के नजरिये से परिणाम ज्यादा महत्व रखने वाले हैं. दरअसल, भाजपा का यही दृष्टिकोण कमलनाथ की स्थिति को अलग बना रहा है. इस चुनाव में कमलनाथ अपनी चार माह पुरानी सरकार के भविष्य की लड़ाई भी लड़ रहे हैं.
आशंका में हैं कि दिल्ली में अगर मोदी सरकार लौटी, तो प्रदेश में उनकी सरकार पर जोखिम बढ़ सकता है. गुना में बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती सरकार को समर्थन पर पुनर्विचार की धमकी दे चुकी हैं. पिछले साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 230 में से 114 और भाजपा को 109 सीटों पर जीत मिली थी. चार निर्दलीय, बसपा के दो और सपा के 1 विधायक के समर्थन से कमलनाथ ने सदन में बहुमत साबित किया था. न सिर्फ तोमर बल्कि भाजपा के अन्य नेता भी हौसला बढ़ाने के लिए यह समझाना नहीं भूलते कि मोदी के लौटने पर अपनी सरकार भी लौट आयेगी.
कांग्रेस में पूरी कमान कमलनाथ के हाथ
कांग्रेस के सारे सूत्र मुख्यमंत्री कमलनाथ के हाथ में हैं. हाल ही में उन्होंने धार, खंडवा और खरगोन में कांग्रेस को नुकसान पहुंचा रहे उम्मीदवारों को बैठाने में कामयाबी हासिल की. दावा है कि कांग्रेस कम से कम 20 सीटें जीतेगी. जाहिर है इनमें भोपाल और इंदौर भी शामिल हैं. उन्हें शंका थी कि छिंदवाड़ा और गुना में भाजपा दमदार चेहरा उतारेगी, लेकिन दोनों जगहों पर मुफीद हालात बन गये हैं.
भाजपा में उदासीनता और कुछ गुटबाजी भी
15 साल बाद राज्य की सत्ता में लौटी कांग्रेस विधानसभा चुनावों का प्रदर्शन दोहराना चाहती है. हालांकि विधानसभा चुनाव में भाजपा का मत प्रतिशत कांग्रेस से आधा फीसदी अधिक था. विधानसभा सीटों के लिहाज से कांग्रेस को 12 लोकसभा क्षेत्रों में बढ़त थी और भाजपा को नौ सीटों पर नुकसान हुआ था. गुटबाजी से जूझ रही भाजपा का आत्मविश्वास डांवाडोल है, कार्यकर्ता उदासीन हैं.
चुनाव या इवेंट मैनेजमेंट
सभी 29 लोकसभा सीटों पर भाजपा व कांग्रेस के बीच ही सीधी टक्कर है. पांचवें चरण में सोमवार को सात सीटों पर मतदान हुआ. पूरा चुनाव इवेंट मैनेजमेंट की तर्ज पर हो रहा है. राज्य के शहरी और कस्बों में चुनाव जैसा माहौल नहीं है. दोनों ही पार्टियों ने मैनेजमेंट टीमें बैठा रखी हैं, वॉर रूम और कंट्रोल रूम बनाये गये हैं.
कर्जमाफी पर घिर सकती है कांग्रेस
शहरी इलाकों में पीएम मोदी की वापसी बड़ा मुद्दा है. इस नजरिये से लोग भाजपा उम्मीदवार की खामियां नहीं देख रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऐसी स्थिति नहीं है. कांग्रेस किसानों को 2 लाख तक का कर्ज माफ करने के वादे के साथ सत्ता में आयी थी. उसका दावा भी है कि करीब 22 लाख किसानों के कर्ज माफ हो गये हैं. शेष 28 लाख किसानों के भी चुनाव बाद कर्ज माफ होंगी, लेकिन भाजपा इसे वादाखिलाफी बता कर प्रचारित कर रही है.
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