I-PAC ED Raid: ममता बनर्जी ने किया राज्य सत्ता का गलत इस्तेमाल, सुप्रीम कोर्ट को ईडी ने बतायी सारी बात
Published by : Ashish Jha Updated At : 24 Apr 2026 8:11 AM
ममता बनर्जी
I-PAC ED Raid: ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ममता बनर्जी ने आइ-पैक मामले की जांच में बाधा डालने के लिए राज्य तंत्र का इस्तेमाल किया. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी.
मुख्य बातें
I-PAC ED Raid: कोलकाता/नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा जाने का आरोप लगाते हुए, प्रवर्तन निदेशालय (इडी) ने गुरुवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 2,700 करोड़ रुपये के कोयला तस्करी मामले में आइ-पैक के खिलाफ उसकी जांच में बाधा डालने के लिए राज्य तंत्र का इस्तेमाल किया. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष इडी और उसके अधिकारी रॉबिन बंसल की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) को प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की जांच का निर्देश देने का अनुरोध किया.
ममता पर तलाशी रोकने और सबूत जब्त करने का आरोप
अदालत इडी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि धन शोधन जांच के संबंध में आठ जनवरी को कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आइ-पैक) के कार्यालय की तलाशी के दौरान बनर्जी और अन्य राज्य अधिकारियों ने बाधा डाली थी. इडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने भारी पुलिस बल के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करते हुए तलाशी रोक दी और संघीय अधिकारियों द्वारा एकत्र किए गए सबूतों को जब्त कर लिया. कार्यवाही की शुरुआत सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी के बीच तीखी बहस से हुई.
अधिकारी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं
गुरुस्वामी ने इडी पर अदालत को ‘राजनीतिक अभियान में सोशल मीडिया हथियार’ के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया. सॉलिसिटर जनरल ने कहा- मैं सड़क पर लड़ने वाले की तरह व्यवहार नहीं कर सकता. मैं गरिमापूर्ण मौन बनाये रखता हूं. इडी और उसके अधिकारी की याचिका सुनवाई योग्य नहीं है, इस दलील का जवाब देते हुए कि उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत याचिका वैध है क्योंकि ‘कानून का शासन’ अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का अभिन्न अंग है. उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री कानून को अपने हाथ में लेती हैं, तो नागरिकों के रूप में जांच अधिकारियों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है.
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डॉ आंबेडकर की कल्पना से बाहर की घटना
मेहता ने कहा-डॉ आंबेडकर ने कभी ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की थी. मुख्यमंत्री सैकड़ों पुलिस अधिकारियों के साथ परिसर में घुस गयीं. वे दस्तावेज ले गये, कंप्यूटर बैकअप रोक दिये और सुरक्षा कैमरों का डेटा छीन लिया. यह कोई अकेली घटना नहीं है; यह एक पैटर्न है. उन्होंने कहा- पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी है. यह मेरी कानूनी दलील है. मैं यह साबित करूंगा कि कानून का उल्लंघन कैसे हो रहा है. यह मामला कोयले की अवैध तस्करी का है, जिसकी कुल राशि 2,700 करोड़ रुपये है. इडी और उनके अधिकारी, जो भारत के नागरिक हैं और अपने वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं, अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा का अनुरोध कर रहे हैं.
पश्चिम बंगाल में ऐसा पहली बार नहीं हुआ
विधि अधिकारी ने पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार से जुड़ी 2019 की घटना का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल में जांच को रोकने के लिए संघीय अधिकारियों को गिरफ्तार करने का इतिहास रहा है. इडी ने कथित बाधा डालने और ‘प्रतिशोधात्मक’ प्राथमिकी से जुड़ी जांच को सीबीआइ को सौंपने के लिए निर्देश का अनुरोध किया है. इडी का कहना है कि मुख्यमंत्री और राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों के आचरण की जांच के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की आवश्यकता है. मामले की अगली सुनवाई 13 मई को होगी.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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