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SC में CBI ने लालू की जमानत याचिका का किया विरोध, कहा - बीमारी के बहाने राजनीतिक गतिविधि में भाग लेना चाहते हैं

Updated at : 09 Apr 2019 6:05 PM (IST)
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SC में CBI ने लालू की जमानत याचिका का किया विरोध, कहा - बीमारी के बहाने राजनीतिक गतिविधि में भाग लेना चाहते हैं

नयी दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अरबों रुपये के चारा घोटाले से संबंधित मामलों में दोषी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका का मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में विरोध किया और कहा कि इससे ‘उच्च पदों पर भ्रष्टाचार’ के मामलों के संबंध में बहुत ही गलत परंपरा पड़ेगी. लालू प्रसाद […]

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नयी दिल्ली : केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अरबों रुपये के चारा घोटाले से संबंधित मामलों में दोषी बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका का मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में विरोध किया और कहा कि इससे ‘उच्च पदों पर भ्रष्टाचार’ के मामलों के संबंध में बहुत ही गलत परंपरा पड़ेगी. लालू प्रसाद इस समय रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद हैं.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सीबीआई ने कहा कि लोकसभा के चुनावों के मद्देनजर लालू प्रसाद के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने और जमानत का दुरूपयोग करने की संभावना है.शीर्ष अदालत लालू यादव की जमानत याचिका पर बुधवार को विचार करेगी. न्यायालय ने जांच ब्यूरो को इस मामले में आज ही जवाब दाखिल करने के लिए कहा था. सीबीआई ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसमें जमानत देने से उच्च पदों पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता के मामलों में बहुत ही गलत परंपरा पड़ेगी.

जांच ब्यूरो ने कहा कि यदि दोषी व्यक्ति को इस तरह के आधारों को पेश करने की अनुमति दी गयी तो एक कारोबारी, जो भ्रष्टाचार का दोषी पाया गया हो, भी इस आधार पर जमानत का अनुरोध कर सकता है कि उसके अपराध की गंभीरता के बावजूद सजा की अवधि के दौरान वह अपना कारोबार करना चाहता है. सीबीआई ने कहा कि वैसे भी पिछले आठ महीने से भी अधिक समय से लालू प्रसाद यादव अस्पताल वार्ड में हैं और राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त हो रहे हैं.

जांच ब्यूरो ने अपने जवाब में कहा, ‘याचिकाकर्ता (लालू यादव) को उसके अस्पताल में रहने की अवधि में न सिर्फ सभी सुविधाओं वाला विशेष भुगतान वार्ड दिया गया है बल्कि एक तरह से वह वहां से राजनीतिक गतिविधियां चला रहे हैं जो उनसे मुलाकात करने वालों की सूची से स्पष्ट है.’ ब्यूरो ने कहा कि यादव इतना अधिक बीमार होने का दावा करते हैं कि वह जेल में नहीं रह सकते और उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है लेकिन अचानक ही वह शारीरिक रूप से पूरी तरह ठीक हो गये और जमानत चाहते हैं.

जांच एजेंसी ने कहा कि एक ओर मेडिकल आधार पर जमानत का मुद्दा उठाना और साथ ही लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी अध्यक्ष के नाते सारी जरूरी जिम्मेदारियों को पूरा करने और पार्टी को निर्देशित करने के लिये जमानत का अनुरोध करना परस्पर विरोधी है और याचिकाकर्ता मेडिकल आधार पर जमानत की आड़ में अपनी राजनीतिक गतिविधियां चलाना चाहता है जिसकी कानून के तहत अनुमति नहीं है.

जांच ब्यूरो ने आगे कहा कि लालू प्रसाद ऐसा आभास देने का प्रयास कर रहे हैं कि मानो उन्हें सिर्फ 3.5 साल की कैद हुई है और वह इस सजा का काफी हिस्सा पूरा कर चुके हैं जो ‘गुमराह’ करने वाला है और ‘तथ्यात्मक रूप से गलत’ है. लालू प्रसाद यादव को चार मामलों में दोषी ठहराया गया है और इसमें उन्हें 168 महीने की सजा हुई है. इसमें से उन्होंने अभी सिर्फ 20 महीने की ही सजा पूरी की है जो उन्हें सुनायी गयी सजा का 15 फीसदी से भी कम है.

जांच ब्यूरो ने कहा कि इस तरह यादव के अपने ही कथन के अनुसार वह सजा के निलंबन और जमानत के लिये ‘आधी सजा पूरी करने के सिद्धांत’ को पूरा नहीं करते हैं. राजद प्रमुख ने अपनी जमानत याचिका खारिज करने के झारखंड उच्च न्यायालय के दस जनवरी के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है. लालू प्रसाद को नौ सौ करोड़ रूपए से अधिक के चारा घोटाले से संबंधित तीन मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है. ये मामले 1990 के दशक में, जब झारखंड बिहार का हिस्सा था, धोखे से पशुपालन विभाग के खजाने से धन निकालने से संबंधित हैं.

लालू प्रसाद ने उच्च न्यायालय में जमानत के लिए अपनी उम्र और गिरते स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा था कि वह मधुमेह, रक्तचाप और कई अन्य बीमारियों से जूझ रहे हैं और उन्हें चारा घोटाले से संबंधित एक मामले में पहले ही जमानत मिल गयी थी. राजद सुप्रीमो को झारखंड में स्थित देवघर, दुमका और चाईबासा के दो कोषागार से छल से धन निकालने के अपराध में दोषी ठहराया गया है. इस समय उन पर दोरांदा कोषागार से धन निकाले जाने से संबंधित मामले में मुकदमा चल रहा है.

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