लोकसभा चुनाव 2019 : नतीजा आने में हो सकती है देरी, जानें क्यों

Updated at : 08 Apr 2019 6:17 PM (IST)
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लोकसभा चुनाव 2019 : नतीजा आने में हो सकती है देरी, जानें क्यों

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि आगामी लोकसभा चुनावों में चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं के बेहतर भरोसे के लिए मतगणना के दौरान एक विधानसभा क्षेत्र में वीवीपैट पर्चियों के आकस्मिक जांच को एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच केंद्र किया जाये. शीर्ष न्यायालय के इस आदेश […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि आगामी लोकसभा चुनावों में चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं के बेहतर भरोसे के लिए मतगणना के दौरान एक विधानसभा क्षेत्र में वीवीपैट पर्चियों के आकस्मिक जांच को एक मतदान केंद्र से बढ़ाकर पांच केंद्र किया जाये. शीर्ष न्यायालय के इस आदेश से 23 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजों में देरी हो सकती है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने 21 विपक्षी दलों के नेताओं के इस अनुरोध को नहीं माना कि ईवीएम मशीनों से लगी वीवीपैट की कम से कम 50 फीसदी पर्चियों का मिलान किया जाना चाहिए. पीठ ने कहा कि ऐसा करने के लिए बहुत अधिक लोगों की आवश्यकता होगी और संगठनात्मक असुविधाओं को ध्यान में रखते हुए ऐसा करना संभव नहीं होगा. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव में वीवीपैट की कम से कम 50 फीसदी पर्चियों की गणना का आयोग को निर्देश देने के लिए यह याचिका दायर की थी.

शीर्ष न्यायालय के इस आदेश पर चुनाव आयोग ने कहा है कि मतगणना के दौरान प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केंद्रों की वीवीपैट मशीनों की पर्ची का मिलान ईवीएम के मतों से करने के फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू किया जायेगा. आयोग ने अदालत में मौजूदा व्यवस्था को ही बहाल रखने का अनुरोध किया था. आयोग की दलील थी कि मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाने से मतगणना में बहुत अधिक समय लगेगा साथ ही इसके लिए मतदान में लगनेवाले मानव संसाधन को भी बढ़ाना होगा. अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आयोग की प्रवक्ता ने कहा, आयोग उच्चतम न्यायालय के फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए हरसंभव उपाय करेगा.

उल्लेखनीय है कि यह फैसला सुनानेवाली पीठ की अध्यक्षता कर रहे उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने भी याचिकाकर्ता 21 विपक्षी दलों की 50 प्रतिशत वीवीपीएटी मशीनों की पर्चियों का मिलान करने की मांग से असहमति जतायी. उन्होंने कहा कि इसके लिए अत्यधिक मात्रा में कर्मचारियों को तैनात करना होगा, जो कि व्यावहारिक नहीं है. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने न्यायालय के फैसले को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि इससे चुनाव प्रक्रिया के प्रति मतदाताओं में विश्वास बहाली के प्रयासों को बल मिलेगा. कुरैशी ने 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों का ईवीएम के मतों से मिलान करने पर चुनाव परिणाम में देरी होने की आयोग की दलील को गलत बताया.

इस मामले की शनिवार को उच्चतम न्यायालय में सुनवाई हुई थी. जिसमें विपक्ष ने कहा था कि लोकसभा चुनाव के नतीजों में उन्हें छह दिन की देरी मंजूर है, लेकिन 50 फीसदी वीवीपैट पर्चियों का मिलान होना चाहिए. उनका कहना है कि चुनाव आयोग का दावा है कि 13.5 लाख ईवीएम मशीनों का इस्तेमाल चुनाव में होगा. मामले में उच्चतम न्यायालय में तेलुगू देशम पार्टी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के मुखिया शरद पवार, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन, लोकतांत्रिक जनता दल के मुखिया शरद यादव, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी के नेता सतीश चंद्र मिश्रा, डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और नेशनल कांग्रेस के फारूक अब्दुल्ला ने याचिका दाखिल की थी.

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