फर्नांडिस के जीवन का एक अहम अध्याय था बड़ौदा डायनामाइट केस
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 29 Jan 2019 5:55 PM
अहमदाबाद : इंदिरा गांधी सरकार के दौरान लगाये गये आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ने को लेकर जेल गये जॉर्ज फर्नांडिस के जीवन का एक अहम अध्याय बड़ौदा डायनामाइट केस भी रहा था. यह मामला 40 से भी अधिक पुराना है. पुल और रेल एवं सड़क मार्गों को विस्फोट कर उड़ाने के लिए डायनामाइट हासिल करने […]
अहमदाबाद : इंदिरा गांधी सरकार के दौरान लगाये गये आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ने को लेकर जेल गये जॉर्ज फर्नांडिस के जीवन का एक अहम अध्याय बड़ौदा डायनामाइट केस भी रहा था. यह मामला 40 से भी अधिक पुराना है.
पुल और रेल एवं सड़क मार्गों को विस्फोट कर उड़ाने के लिए डायनामाइट हासिल करने की साजिश रचने के आरोप में फर्नांडिस को 1976 में गिरफ्तार किया गया था. यह मामला सीबीआई को सौंपा गया था. आपातकाल के दौरान उनके साथ काम चुके एक कार्यकर्ता ने बताया कि डायनामाइट खरीद कर सरकार को यह संदेश देने की योजना थी कि वे आपातकाल लगाये जाने के आगे नहीं झुकेंगे. अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके फर्नांडिस (88) का लंबी बीमारी के बाद मंगलवार सुबह दिल्ली में निधन हो गया.
बड़ौदा डायनामाइट मामले में सीबीआई के आरोपपत्र में कहा गया था कि जांच से पता चला कि 25/6/1975 को देश में आपातकाल की घोषणा किये जाने पर फर्नांडिस भूमिगत हो गये और उन्होंने आपातकाल लगाये जाने के खिलाफ प्रतिरोध करने तथा आपराधिक ताकत का प्रदर्शन कर सरकार को डराने का फैसला किया. फर्नांडिस को इस साजिश का सरगना के तौर पर दिखाया गया था और दिल्ली की एक अदालत में सीबीआई द्वारा दाखिल आरोपपत्र में उन्हें आरोपी नंबर एक बनाया गया था. आरोपपत्र में कुल 25 आरोपियों को नामजद किया गया था. आरोपपत्र के मुताबिक, फर्नांडिस मध्य जुलाई 1975 में अहमदाबाद पहुंचे और सह आरोपियों के साथ गुप्त बैठकें की. सरकार को उखाड़ फेंकने के मकसद से गैरकानूनी गतिविधियां करने के लिए वह आपराधिक साजिश में शामिल हुए. इसमें कहा गया है, भरत पटेल नाम के एक व्यक्ति के जरिये डायनामाइट की छड़ें और डेटोनेटर तथा फ्यूज तार खरीदने की योजना थी.
आरोपपत्र के मुताबिक, विस्फोटकों का इस्तेमाल पुलों और रेल तथा सड़क मार्गों को विस्फोट कर उड़ाने में करने का फैसला किया गया था. इसका मकसद व्यापक अव्यवस्था फैलाना और अंतिम उद्देश्य केंद्र की सरकार को उखाड़ फेंकना था. बड़ौदा पुलिस ने शहर के रावपुरा इलाके में एक छापे के दौरान विस्फोटक बरामद किये थे. फर्नांडिस को जून 1976 में 22 अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया और उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल भेज दिया गया. हालांकि, अदालत में फर्नांडिस ने अपनी ओर से इस तरह की किसी साजिश किये जाने के बात से इनकार किया और सीबीआई के आरोपपत्र को मनगढ़ंत बताया. उन्होंने कहा कि तानाशाही के खिलाफ उनकी लड़ाई बुराई के खिलाफ लड़ने की भावना से आयी है और इसका मकसद किसी की हत्या करना नहीं था.
सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश शाह ने फर्नांडिस से मुलाकात की थी और आपातकाल से उस वक्त लड़ने का फैसला किया था जब फर्नांडिस गुजरात में भूमिगत थे. उन्होंने कहा, किसी की जान लेने या विस्फोट करने का कोई इरादा नहीं था. बाद में मोरारजी देसाई नीत जनता पार्टी की सरकार ने फर्नांडिस और अन्य के खिलाफ मामले वापस ले लिये.
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