10 फीसद आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजा नोटिस
Updated at : 25 Jan 2019 11:58 AM (IST)
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नयी दिल्ली : सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसद आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस व्यस्था पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. आरक्षण मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. कोर्ट […]
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नयी दिल्ली : सामान्य वर्ग के लोगों को 10 फीसद आरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है हालांकि कोर्ट ने फिलहाल इस व्यस्था पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. आरक्षण मामले में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. कोर्ट ने कहा है हम इस पूरे मुद्दे की जांच करेंगे.
कोर्ट इन मामलों में दाखिल याचिका की सुनवाई चार हफ्तों के बाद करेगा. कोर्ट में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए 10 फीसद आरक्षण के मामले पर याचिका दायर की गयी है. इन दायर जनहित याचिकाओं में केंद्र सरकार के इस फैसले पर तुरंत रोक लगाने की अपील की गयी है.
कोर्ट ने इन याचिकाओं के आधार पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर पूरे मामले में जवाब मांगा है. इस मामले में तहसीन पूनावाला ने भी जनहित याचिका दायर की उन्होंने कहा है कि यह फैसला संविधान की मूल भावनाओं का उल्लंघन करती है. आरक्षण के लिए अधिकतम सीमा 50 फीसदी तय की गई है फिर यह दायरा क्यों बढ़ाया गया है.
इस मामले में पूनावाला की तरफ से सरकरा को प्रतिवादी बनाया गया है इसमें उन्होंने स्पष्ट किया है कि आर्थिक आधार पर आरक्षण की चर्चा संविधान में कही नहीं है. इस मामले में कोर्ट में दायर जनहित याचिकाओं में इंदिरा साहनी जजमेंट का भी उदाहरण दिया गया है जिसमें कोर्ट नेही 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण ना देने का फैसला दिया था.
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