नये CBI Chief पर कोई फैसला नहीं, मोदी की अगुवाई वाली समिति की दोबारा होगी बैठक

नयी दिल्ली : अगले सीबीआई प्रमुख के नाम पर फैसला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की गुरुवार को हुई बैठक बेनतीजा रही. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई निदेशक के नाम पर बैठक में कोई फैसला नहीं लिया गया. एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं होने […]
नयी दिल्ली : अगले सीबीआई प्रमुख के नाम पर फैसला करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की गुरुवार को हुई बैठक बेनतीजा रही. अधिकारियों ने यह जानकारी दी. अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई निदेशक के नाम पर बैठक में कोई फैसला नहीं लिया गया.
एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं होने के अनुरोध पर बताया, सक्षम अधिकारियों के दस्तावेजों के साथ उनकी सूची समिति के सदस्यों के साथ साझा की गयी. लेकिन, अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि नाम तय करने के लिए समिति की एक और बैठक जल्द बुलायी जायेगी. प्रधानमंत्री आवास पर हुई बैठक में प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी हिस्सा लिया. सीबीआई प्रमुख का पद 10 जनवरी को आलोक वर्मा को इस पद से हटाये जाने के बाद से ही खाली पड़ा था. वर्मा का गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी राकेश अस्थाना से भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर झगड़ा चल रहा था. वर्मा और अस्थाना दोनों ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाये थे. वर्मा को सीबीआई निदेशक के पद से हटाये जाने के बाद उन्हें दमकल सेवा, नागरिक रक्षा और होम गार्ड्स का महानिदेशक बनाया गया था. यह सीबीआई प्रमुख की तुलना में कम महत्वपूर्ण पद था.
वर्मा ने उस पेशकश को स्वीकार नहीं किया और उन्होंने सरकार को पत्र लिखकर कहा कि उन्हें सेवानिवृत्त मान लिया जाना चाहिए क्योंकि उनकी 60 साल की आयु पूरी हो चुकी है. उन्होंने एक फरवरी 2017 को सीबीआई निदेशक का पदभार संभाला था. सीबीआई प्रमुख के तौर पर उनका कार्यकाल दो साल का था. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) के सचिव सी चंद्रमौली को लिखे गये पत्र में वर्मा ने कहा था कि वह 31 जुलाई 2017 को ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं इसलिए सरकार द्वारा प्रस्तावित नये पदभार को ग्रहण नहीं कर सकते. केंद्र ने वर्मा के पत्र पर अपने फैसले को सार्वजनिक नहीं किया है. केंद्र ने एम नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया था. वर्मा के इस्तीफे से राजनीतिक भूचाल आ गया था जिसमें विपक्ष, खासतौर से कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सार्वजनिक संस्थानों में कथित रूप से हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया था.
खड़गे ने हाल ही में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राव की सीबीआई के अंतरिम प्रमुख के रूप में नियुक्ति को गैर कानूनी बताया था. उन्होंने नये सीबीआई प्रमुख का चयन करने के लिए सरकार से तत्काल समिति की बैठक बुलाने को कहा था. कांग्रेस ने कहा कि नये सीबीआई प्रमुख को चुनने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी होनी चाहिए तथा सबसे योग्य व्यक्ति का चयन किया जाना चाहिए. पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी ने संवाददाताओं से कहा, हम आशा करते हैं कि चयन की प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए और सबसे योग्य व्यक्ति का चयन होना चाहिए. हम सिर्फ यही चाहते हैं. उन्होंने कहा कि लोकपाल और लोकायुक्त विधेयक में पूरी मंशा यही थी कि सीबीआई का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति सत्ता प्रतिष्ठान के करीबी नहीं हो तथा नियुक्ति में यही सुनिश्चित होना चाहिए.
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