अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर विशेष : जब आपातकाल के बाद बोले थे अटल, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Dec 2018 7:35 PM
"बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने, कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने. खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने". पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ये लाइन उस वक्त कही थी, जब आपातकाल के बाद चुनाव की घोषणा हुई. दिल्ली की ठंड में जनता पार्टी की सभा हो […]
"बाद मुद्दत के मिले हैं दीवाने, कहने सुनने को बहुत हैं अफसाने. खुली हवा में जरा सांस तो ले लें, कब तक रहेगी आजादी कौन जाने". पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ये लाइन उस वक्त कही थी, जब आपातकाल के बाद चुनाव की घोषणा हुई. दिल्ली की ठंड में जनता पार्टी की सभा हो रही थी हल्की-हल्की बारिश थी, लोगों को लग रहा था कि भीड़ छटने लगेगी, लेकिन लोग चुपचाप बैठे इंतजार कर रहे थे.
इंतजार था, अटल बिहारी वाजपेयी के संबोधन का. आज पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ और दिल्ली के एम्स अस्पताल में उन्होंने 16 अगस्त, 2018 को शाम 5 बजकर 5 मिनट पर अंतिम सांस ली.
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