राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 : वसुंधरा के बेटे और बहू ने संभाली प्रचार की कमान, मानवेंद्र दे रहे उनके गढ़ में चुनौती

Updated at : 03 Dec 2018 7:05 AM (IST)
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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 : वसुंधरा के बेटे और बहू ने संभाली प्रचार की कमान, मानवेंद्र दे रहे उनके गढ़ में चुनौती

झालरापाटन से अंजनी कुमार सिंह मानवेंद्र से सहानुभूति रखने वाले राजपूत भी वसुंधरा के पक्ष में राज्य की सर्वाधिक चर्चित सीट झालरापाटन में कांग्रेस जहां भाजपा के मजबूत किले में सेंध लगाने की कोशिश में जुटी है, वहीं भाजपा अपने किले को और अधिक मजबूत बनाने के प्रयास में है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की इस […]

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झालरापाटन से अंजनी कुमार सिंह
मानवेंद्र से सहानुभूति रखने वाले राजपूत भी वसुंधरा के पक्ष में
राज्य की सर्वाधिक चर्चित सीट झालरापाटन में कांग्रेस जहां भाजपा के मजबूत किले में सेंध लगाने की कोशिश में जुटी है, वहीं भाजपा अपने किले को और अधिक मजबूत बनाने के प्रयास में है. मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की इस सीट पर कांग्रेस ने भाजपा के दिग्गज नेता जसवंत सिंह के पुत्र मानवेंद्र सिंह को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबला रोचक बना दिया है.
कांग्रेस की कोशिश मानवेंद्र के बहाने वसुंधरा राजे को उनके क्षेत्र में घेरने की रही है, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है. इसका कारण यहां की जनता खुद बताती है, ‘मैडम (वसुंधरा राजे) संभाले राजस्थान, जनता संभालेगी झालाबार’. इस सीट पर जीत-हार जिस किसी की भी हो, लेकिन मानवेंद्र ने भाजपा के गढ़ में आकर चुनौती देने का जो साहस दिखाया है, उससे यह सीट देशभर में चर्चा का केंद्र बनी हुई है.
वसुंधरा 29 वर्षों से कर रही हैं इलाके का प्रतिनिधित्व बेटे और बहू ने संभाली प्रचार की कमान
मानवेंद्र के ‘स्वाभिमान’ और सरकार के एंटी-इंकंबेंसी का प्रभाव यहां कम दिखता है. मानवेंद्र से सहानुभूति रखने वाले राजपूत मतदाता भी यहां वसुंधरा के पक्ष में हैं, इसका कारण, उनका मत किसी विधायक के लिए नहीं, बल्कि सूबे के मुख्यमंत्री के लिए निर्णायक होना बताया जा रहा है. यह वसुंधरा का गृह जिला है, जिसका प्रतिनिधित्व वह पिछले 29 वर्षों से कर रही हैं. राजपूत मतदाता यह सवाल भी कर रहे हैं कि सबकुछ जानते हुए भी कांग्रेस ने ‘शहीद’ होने के लिए एक ‘राजपूत’ को ही क्यों चुना? झालरापाटन के गांवों में वसुंधरा राजे के प्रति सहानुभूति है. रलाइता-रलाइती, माधवपुर, कलमंडी, हरीशपुरा आदि में भील, बंजारे, यादव, कोली की संख्या ज्यादा है.
इन गांवों में मानवेंद्र से ज्यादा वसुंधरा के प्रति सहानुभूति है. मनोज नामदेव, विष्णु यादव, रईफ, गाेविंद कामदेव आदि कहते हैं, पहले यहां पहुंचना मुश्किल होता था. आज जो भी दिख रहा है, सब ‘मैडम’ की देन है. ऐसी ही बात करमखेड़ी, निमोदा, ऊंदल, देवड़ी, सिंघानियां गांव के लोग भी कहते हैं. झालावार में कांग्रेस की पूर्व एमएलए और राजे के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली मीनाक्षी चंद्रावत बताती हैं -लोगों में सरकार के खिलाफ गुस्सा है. वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष संजय जी जैन ताऊ कहते हैं, क्षेत्र में हुए विकास के आधार पर पार्टी कार्यकर्ता पिछली बार की 61 हजार की जीत को एक लाख के ऊपर पहुंचाने में जुटे हैं.
वसुंधरा राजे के चुनाव प्रचार की कमान उनके सांसद पुत्र दुष्यंत सिंह और बहू निहारिका सिंह संभाले हुए हैं, वहीं मानवेंद्र सिंह खुद गांव- गांव जाकर लोगों से संपर्क बना रहे हैं. मानवेंद्र राजपूतों के साथ अनुसूचित जाति और जनजाति को अपने पाले में करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन, उनके लिए चिंता की बात यह है कि यहां के मुस्लिम मतदाता भी वसुंधरा के पक्ष में मतदान करते रहे हैं.
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