नये सीजेआइ रंजन गोगोई के पास न घर है न कार और न ही कर्ज

Updated at : 04 Oct 2018 7:52 AM (IST)
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नये सीजेआइ रंजन गोगोई के पास न घर है न कार और न ही कर्ज

नेशनल कंटेंट सेलअटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को कहा था कि जजों की सैलरी तिगुनी होनी चाहिए. वेणुगोपाल के अचानक कही गयी इस बात से लोग चौंक गये थे. लोगों ने उनकी बात पर सोचना शुरू ही किया था कि सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा संपत्ति को लेकर दिया गया घोषणापत्र सामने आ गया. […]

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नेशनल कंटेंट सेल
अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सोमवार को कहा था कि जजों की सैलरी तिगुनी होनी चाहिए. वेणुगोपाल के अचानक कही गयी इस बात से लोग चौंक गये थे. लोगों ने उनकी बात पर सोचना शुरू ही किया था कि सुप्रीम कोर्ट के जजों द्वारा संपत्ति को लेकर दिया गया घोषणापत्र सामने आ गया. इसमें विदा हो रहे सीजेआई दीपक मिश्रा और नये सीजेआइ रंजन गोगोई की संपत्तियां चर्चा का विषय बन गयी. तब जाकर लोगों को समझ आया कि अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने सैलरी तिगुनी करने की बात क्यों की थी.

देश के 46वें सीजेआइ जस्टिस रंजन गोगोई के पास सोने की एक भी ज्वेलरी नहीं है. वहीं, उनकी पत्नी के पास जो कुछ गहने हैं, वह शादी के वक्त उनके माता-पिता, रिश्तेदारों और दोस्तों की तरफ से भेंट में दी गयी हैं. गोगोई के पास कोई गाड़ी नहीं है और न ही कोई कर्ज या दूसरी देनदारियां हैं. एलआइसी पॉलिसी समेत गोगोई और उनकी पत्नी के पास कुल मिलाकर 30 लाख रुपये बैंक बैलेंस है. जुलाई में उन्होंने अपने शपथपत्र में घोषणा की थी कि उन्होंने गुवाहाटी के बेलटोला में हाईकोर्ट का जज बनने से पहले ही 1999 में एक प्लॉट खरीदा था. अपने घोषणापत्र में उन्होंने बताया कि उस प्लॉट को उन्होंने जून में 65 लाख रुपये में बेच दिया था. उन्होंने खरीदार के नाम का भी जिक्र किया है.

उन्होंने बताया कि उनकी मां ने जून 2015 में गुवाहाटी के नजदीक जैपोरिगोग गांव में जमीन का एक प्लॉट उनके और उनकी पत्नी के नाम ट्रांसफर किया था. वहीं, पूर्व सीजेआई मिश्रा ने दिल्ली के मूयर विहार में एक फ्लैट खरीदने के लिए 22.5 लाख रुपये का लोन लिया है, जिसकी किस्तें वह चुका रहे हैं.

बड़े वकीलों की एक दिन की कमाई से भी कम है कुल संपत्ति
पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा हाइकोर्ट में स्थायी जज के तौर पर 21 सालों की सेवा के बाद रिटायर हुए. इनमें से 14 साल वह अलग-अलग हाइकोर्ट में जज रहे. दूसरी तरफ, जस्टिस गोगोई 28 फरवरी, 2001 को गुवाहाटी हाईकोर्ट के जज बने थे और 23 अप्रैल, 2012 को सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ ली. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज लंबे कार्यकाल के बावजूद इन दोनों की निजी संपत्तियां बिल्कुल मामूली है. कामयाब वरिष्ठ वकीलों के मुकाबले तो इनकी संपत्तियां कुछ भी नहीं हैं. इनके बैंक बैलेंस में जीवनभर की बचत और दूसरी संपत्तियों को एक साथ करके भी देखा जाये तो यह तमाम वरिष्ठ वकीलों की एक दिन की कमाई से भी कम होगी. सुप्रीम कोर्ट के सफल वरिष्ठ वकील एक दिन में ही 50 लाख रुपये से ज्यादा कमा लेते हैं. सीजेआई की सैलरी प्रति महीने 2.80 लाख है, तो सुप्रीम कोर्ट के जज की सैलरी 2.50 लाख है.

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