#Sabarimala : जानें, आखिर क्यों जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने किया मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध

नयी दिल्ली : आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए हिंदुओं के प्रसिद्ध धर्म स्थलों में शुमार सबरीमाला में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी. कोर्ट ने कहा कि भक्ति के मामले में लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पांच जजों की […]
नयी दिल्ली : आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए हिंदुओं के प्रसिद्ध धर्म स्थलों में शुमार सबरीमाला में हर आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी. कोर्ट ने कहा कि भक्ति के मामले में लैंगिक भेदभाव नहीं किया जा सकता. लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पांच जजों की इस बेंच की एकमात्र महिला सदस्य जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने महिलाओं के प्रवेश का विरोध किया और फैसला 4:1 के बहुमत से हुआ.
#SabrimalaVerdict केरल के सबरीमाला मंदिर में अब हर आयुवर्ग की महिलाओं को मिलेगा प्रवेश : सुप्रीम कोर्ट
आखिर क्यों जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने किया महिलाओं के प्रवेश का विरोध
सबरीमाला मंदिर में हर आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने कहा कि धार्मिक मामलों का निपटारा विश्वास और परंपराओं के अनुसार होता है, इसलिए इसपर निर्णय लेते हुए संविधान वर्णित प्रावधानों के अनुसार निर्णय नहीं किया जाना चाहिए और ना ही यहां समानता के अधिकार को लागू किया जाना चाहिए. जस्टिस मल्होत्रा ने कहा कि यह ऐसा मामला है जिसपर निर्णय धार्मिक समिति ही करे ना कि सुप्रीम कोर्ट. जस्टिस इंदु मल्होत्रा ने केरल हिंदू सार्वजनिक पूजा (प्रवेश प्राधिकरण) नियम, 1 9 65 का समर्थन किया, हालांकि बहुमत से फैसला होने के कारण यह नियम निरस्त हो गया.
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इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति का हुआ था विरोध
इंदु मल्होत्रा 27 अप्रैल, 2018 सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश नियुक्त हुई थीं. इंदु मल्होत्रा देश की पहली ऐसी महिला अधिवक्ता हैं जो अधिवक्ता से सीधे सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश बनीं. जिस वक्त कालेजियम ने उनके और जस्टिस एम जोसेफ के नाम की नियुक्ति सरकार के पास भेजी थी, उस वक्त सरकार ने इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को तो सहमति दे दी, लेकिन जस्टिस जोसेफ का विरोध कर दिया. जिसके कारण वकीलों ने इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति का विरोध किया था और कहा था कि चूंकि उनके नाम की सिफारिश अकेले नहीं की गयी थी इसलिए उनकी नियुक्ति अवैध है. लेकिन चीफ जस्टिस ने इस तर्क को नहीं माना और इंदु मल्होत्रा सुप्रीम कोर्ट की जज बन गयीं.
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