सारधा घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई करने से ED को रोका

Updated at : 03 Aug 2018 5:37 PM (IST)
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सारधा घोटाला : सुप्रीम कोर्ट ने नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई करने से ED को रोका

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सारधा चिट फंड घोटाले से संबंधित एक मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी और वरिष्ठ अधिवक्ता नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय को रोक दिया. न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सारधा चिट फंड घोटाले से संबंधित एक मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की पत्नी और वरिष्ठ अधिवक्ता नलिनी चिदंबरम के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय को रोक दिया.

न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने मद्रास उच्च न्यायालय के एक आदेश के खिलाफ नलिनी चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस भी जारी किया. उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई को सारधा प्रकरण से संबंधित एक मामले में नलिनी चिदंबरम के नाम प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती देनेवाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी. इससे पहले, उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश की पीठ ने भी प्रवर्तन निदेशालय के समन को चुनौती देनेवाली उनकी याचिका खारिज कर दी थी. उच्च न्यायालय ने कहा था कि धन शोधन रोकथाम कानून की धारा 50 (2) में प्राधिकारी को ऐसे किसी भी व्यक्ति को तलब करने का अधिकार है जिसकी उपस्थिति जांच के लिए जरूरी महसूस की जा रही हो.

अदालत ने इस दलील को भी ठुकरा दिया था कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 एक महिला को उनके निवासवाले स्थान से बाहर जांच के लिए नहीं बुलाया जा सकता. अदालत ने कहा था कि वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 160 का उपयोग नहीं कर सकतीं. प्रवर्तन निदेशालय ने नलिनी चिदंबरम को अपने कोलकाता कार्यालय में पेश होने के लिए पहला समन सात सितंबर, 2016 को जारी किया था. फिर एकल न्यायाधीश के आदेश के बाद नये समन जारी किये गये थे. आरोप है कि नलिनी चिदंबरम को अदालत और एक टेलीविजन चैनल खरीदने के सौदे के सिलसिले में कंपनी लॉ बोर्ड में पेश होने के लिए सारधा समूह ने उन्हें एक करोड़ रुपये बतौर फीस दिये थे. नलिनी चिदंबरम ने अपनी अपील में दलील दी थी कि यदि मुवक्किलों को कानूनी सलाह देनेवाले वकीलों को इस तरह से समन भेजने की प्रवृत्ति को शुरू में नहीं रोका गया तो इसके परिणाम घातक हो सकते हैं.

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