देश में अब आसानी से हो सकेगा DNA Test, बढ़ेगी लैब्स की संख्या

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jul 2018 6:13 PM

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नयी दिल्ली : देश में डीएनए टेस्ट कराना आसान होगा. इसकी जांच में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार ने इसके लैब्स की संख्या बढ़ाने और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फैसला किया है. सरकार ने डीएनए आधारित फोरेन्सिक तकनीक के इस्तेमाल […]

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नयी दिल्ली : देश में डीएनए टेस्ट कराना आसान होगा. इसकी जांच में आ रही दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार ने इसके लैब्स की संख्या बढ़ाने और अन्य बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फैसला किया है. सरकार ने डीएनए आधारित फोरेन्सिक तकनीक के इस्तेमाल को विस्तार देने के लिए डीएनए तकनीक (प्रयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2018 को मंजूरी दे दी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके मसौदे को मंजूरी प्रदान की.

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सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, डीएनए आधारित तकनीक (उपयोग एवं अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2018 को कानूनी रूप देने के पीछे प्राथमिक उद्देश्य देश की न्यायिक प्रणाली को सहयोग प्रदान करना एवं उसे सुदृढ़ बनाने के लिए डीएनए जांच के वास्ते फोरेन्सिक तकनीक को बढ़ावा देना है. अपराधों के समाधान एवं गुमशुदा व्यक्तियों की पहचान के लिए ने केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया डीएनए टेस्ट कराया जाता है. डीएनए प्रयोगशालाओं के जरूरी मान्यता देना और उसे लागू किय जाने के प्रावधान के जरिये इस विधेयक में तकनीक का देश में इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दिया गया है.

इसके साथ ही, विधेयक में इस बात का भी भरोसा दिलाया गया है कि डीएनए टेस्ट परिणाम विश्वसनीय हो और नागरिकों के गोपनीयता अधिकारों के लिहाज से डाटा का दुरुपयोग न हो सके. विधेयक के प्रावधान एक तरफ गुमशुदा व्यक्तियों तथा देश के विभिन्न हिस्सों में पाये जाने वाले अज्ञात शवों की परस्पर मिलान करने में सक्षम बनायेंगे, तो बड़ी आपदाओं के शिकार हुए व्यक्तियों की पहचान करने में भी सहायता प्रदान करेंगे.

फोरेन्सिक डीएनए प्रोफाइलिंग का ऐसे अपराधों के समाधान में स्पष्टरूप से महत्व है, जिनमें मानव शरीर (जैसे हत्या, दुष्कर्म, मानव तस्करी या गंभीर रूप से घायल) को प्रभावित करने वाले एवं संपत्ति (चोरी, सेंधमारी एवं डकैती) की हानि से संबंधित मामले से जुड़े अपराध का समाधान किया जाता है. 2016 के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार, देश में ऐसे अपराधों की कुल संख्या हर साल तीन लाख से अधिक है. इनमें से केवल बहुत छोटे हिस्से का ही वर्तमान में डीएनए टेस्ट किया जाता है.

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