कब ‘इच्छामृत्यु होगा वैध, जानें क्या है सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन
Updated at : 09 Mar 2018 1:00 PM (IST)
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आज सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ‘इच्छामृत्यु’ को देश में वैध घोषित कर दिया और कहा कि किसी भी व्यक्ति को सम्मान से मरने का अधिकार है. संविधान पीठ ने कहा कि इस संबंध में कानून बनने तक उसकी ओर से जारी दिशा-निर्देश और हिदायत प्रभावी रहेंगे. भारत में क्या है सुप्रीम […]
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आज सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने ‘इच्छामृत्यु’ को देश में वैध घोषित कर दिया और कहा कि किसी भी व्यक्ति को सम्मान से मरने का अधिकार है. संविधान पीठ ने कहा कि इस संबंध में कानून बनने तक उसकी ओर से जारी दिशा-निर्देश और हिदायत प्रभावी रहेंगे.
भारत में क्या है सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन
बहुचर्चित अरुणा शानबाग के केस में सुनवाई करते हुए मार्च 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ‘इच्छामृत्यु’ की इजाजत दी जा सकती है, अगर व्यक्ति असाध्य रोगों से ग्रस्त हो और उसके ठीक होने की कोई गुंजाइश ना हो और उसके करीबी रिश्तेदार इस बात की अनुमति चाहते हो. वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने दो परिस्थितियां बतायी जबकि किसी व्यक्ति को ‘इच्छामृत्यु’ की इजाजत दी जा सकती है-
1. जब व्यक्ति ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया गया हो और जिसके लिए वेंटीलेटर को बंद किया जा सकता हो.
2. दूसरी स्थिति है पीवीएस, जिसका अर्थ है वह स्थिति जब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह निष्क्रिय हो जाये और उसका मस्तिष्क ऐसे कोई संकेत ना दे रहा हो , जिससे यह लगे कि वह जीवित हो और जिसे चिकित्सकों की देखरेख या हस्तक्षेप के बिना जीवित ना रखा जा सके. इन तमाम परिस्थितियों को पुख्ता कोई मेडिकल बोर्ड ही करेगा. भारत में जहरीला इंजेक्शन लेकर आत्महत्या करने जैसे प्रावधानों को अनुमति नहीं दी गयी है. सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आज कहा है कि जब तक इस मसले पर कानून नहीं बनता हो, तब तक इसी गाइडलाइन पर इच्छामृत्यु की इजाजत दी जायेगी. वर्ष 2014 में 23 दिसंबर को भारत सरकार की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ‘इच्छामृत्यु’ के फैसले को सहमति दी गयी.
किसी भी व्यक्ति को सम्मान से मरने का अधिकार, इच्छामृत्यु वैध : सुप्रीम कोर्ट
सबसे पहले नीदरलैंड ने ‘इच्छामृत्यु’ को बनाया वैध
वर्ष 2002 में सबसे पहले नीदरलैंड ने इच्छामृत्यु को वैध करार दिया और कई दिशा निर्देश भी जारी किये गये. इसके तहत इस बात की सख्त हिदायत दी गयी है कि व्यक्ति किसी गंभीर लाइलाज बीमारी से ग्रस्त हो, साथ ही वह पूरे होश-हवास में इच्छामृत्यु को मंजूरी दे.
अब तक इन देशों ने ‘इच्छामृत्यु’ के कॉन्सेंप्ट को स्वीकारा
इच्छामृत्यु को वैध बनाने का प्रयास कई देशों में हुआ है, लेकिन अभी तक कई देश इसे लेकर संशय की स्थिति में हैं और जहां भी इच्छामृत्यु को वैध माना गया है, वहां काफी सख्त गाइडलाइन जारी किये गये हैं, ताकि इसका गलत इस्तेमाल ना हो सके. जिन देशों में इच्छामृत्यु वैध है वे हैं -नीदरलैंड, बेल्जियम, स्विटरलैंड और अमेरिका के कुछ राज्य. आस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, डेनमार्क, फिनलैंड, आयरलैंड, इजरायल और जापान जैसे देश में इसपर बहस जारी है.
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