Sasaram News : महिलाएं अब बोझ नहीं, परिवार व समाज की आर्थिक ताकत

Published by : PRABHANJAY KUMAR Updated At : 25 Sep 2025 9:31 PM

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शिवसागर प्रखंड में गुरुवार से साहित्य-संस्कृति में महिला शिक्षा और आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण विषय पर मंथन शुरू हुई.

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सासाराम ऑफिस. शकुंतलम इंस्टीट्यूट ऑफ टीचर्स एजुकेशन कॉलेज (एसआइटीइ) शिवसागर प्रखंड में गुरुवार से साहित्य-संस्कृति में महिला शिक्षा और आधुनिक शैक्षिक दृष्टिकोण विषय पर मंथन शुरू हुई. दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की शुरुआत जेएलएन कॉलेज डेहरी ऑन सोन के प्राचार्य डॉ प्रो शैलेंद्र ओझा ने की. दीप जला और पुष्प अर्पण के बाद महिला शिक्षा के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखते हुए डॉ ओझा ने कहा कि वैदिक काल में गार्गी और मैत्रेयी जैसी विदुषियों ने वेद और उपनिषदों में अमूल्य योगदान दिया था. इसी परंपरा को मध्यकाल और ब्रिटिश काल में भी महिलाओं ने आगे बढ़ाया. उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं साहित्य और संस्कृति में ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा हासिल कर सरकारी और गैर सरकारी संस्थानों में भी महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं. मुडो तामो मेमोरियल (एमटीएम) कॉलेज जीरो अरुणाचल प्रदेश के प्राचार्य डॉ राम गोपाल कुशवाहा ने कहा कि आधुनिक समय में महिलाएं एकेडमिक शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं. अब महिलाएं परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि समाज और परिवार की आर्थिक मजबूती में अहम भूमिका निभा रही हैं. पंजाब विश्वविद्यालय के प्राचार्य डॉ आदित्य प्रकाश ने कहा कि शिक्षा महिलाओं को जागरूक, आत्मविश्वासी और सशक्त बनाती है. उन्होंने कहा कि शिक्षित महिलाएं बाल विवाह जैसी कुरीतियों को समाप्त करने और समाज में समान अधिकार स्थापित करने में मददगार साबित होती हैं. पंडित जवाहरलाल नेहरू पीजी कॉलेज बांदा उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ प्रो ओंकार चौरसिया ने भी विषय पर अपनी बात रखी. इस अवसर पर शकुंतलम बीएड कॉलेज के निदेशक डॉ अनिल सिंह के योगदान की विशेष सराहना की गयी. महिला शिक्षा की उपलब्धियों व चुनौतियों पर विमर्श वहीं, कॉलेज की प्रभारी प्राचार्या डॉ सीमा कुमारी ने कहा कि संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य महिला शिक्षा की उपलब्धियों, चुनौतियों और अवसरों पर गहन विमर्श करना है. उन्होंने कहा कि संगोष्ठी में सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका, उच्च शिक्षा और शोध में अवसर, पाठ्यक्रम में लैंगिक संवेदनशीलता, महिला लेखन और सामाजिक परिवर्तन, वैश्वीकरण व डिजिटल मीडिया का प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है, जो दूसरे दिन भी जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि महिला शिक्षा से जुड़े इस मंथन का लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा और यह संगोष्ठी महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी. राष्ट्रीय संगोष्ठी के संरक्षक देवी शकुंतलम प्रतिष्ठान के अध्यक्ष सच्चिदानंद ओझा हैं, जबकि मुख्य संरक्षक एसआइटीइ के निदेशक डॉ अनिल कुमार सिंह हैं. संयोजक मंडल में डॉ जावेद अहमद और डॉ राम निहाल शामिल हैं. सह-समन्वयक के रूप में डॉ संजय कुमार वर्मा, डॉ सतीश कुमार गुप्ता, अविनाश कुमार, शिखा सिमरन, सूरज कुमार, विकास तिवारी और वंदना कुमारी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं. आज दूसरे दिन के सेमिनार में महिला कॉलेज डालमियानगर की डॉ उपासना चौरसिया, कुमारी नीतू रानी सहित अन्य वक्ता शामिल होंगी.

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