Patna News : बांसघाट शवदाह गृह परिसर में उकेरी जायेगी राजा हरिश्चंद्र की कहानी

Published by : SANJAY KUMAR SING Updated At : 15 Sep 2025 1:50 AM

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<P>हिमांशु देव, पटना : बांसघाट पर बन रहा राज्य का पहला आधुनिक सुविधाओं से लैस श्मशान घाट इसी माह के अंतिम सप्ताह तक तैयार कर लिया जायेगा. यहां इलेक्ट्रिक

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हिमांशु देव, पटना : बांसघाट पर बन रहा राज्य का पहला आधुनिक सुविधाओं से लैस श्मशान घाट इसी माह के अंतिम सप्ताह तक तैयार कर लिया जायेगा. यहां इलेक्ट्रिक क्रीमेशन ओवन व वूड क्रीमेशन को इंस्टॉल कर दिया गया है. इससे निकलने वाले धुएं को नियंत्रित करने के लिए पांच चिमनी स्टैक भी लगा दिये गये हैं. दो अक्तूबर को सीएम नीतीश कुमार द्वारा इसका उद्घाटन संभावित है. इसको लेकर सौंदर्यीकरण का काम तेजी से चल रहा है. बांसघाट की दीवारों पर पेंटिंग की जा रही है. यहां इंसान के जन्म से मृत्यु तक की कहानी को प्रदर्शित की जा रही है. साथ ही शांति के लिए स्लोगन को भी लिखा जायेगा. इसके अलावा राजा हरिश्चंद्र की तस्वीर के साथ उनकी कहानी भी उकेरी जायेगी. दरअसल, राजा हरिश्चंद्र को सत्यवादी और कर्तव्य परायणता का प्रतीक माना जाता है. श्मशान घाट में उनकी कहानी को दर्शाने से लोगों को यह याद दिलाया जायेगा कि जीवन का सबसे बड़ा धर्म सत्य और अपने कर्तव्यों का पालन करना है. यह शोक में डूबे लोगों को यह संदेश देगा कि जीवन में आए दुःख और कठिनाइयां अस्थायी होती हैं, लेकिन सच्चाई और धर्म का पालन हमेशा स्थायी रहता है.

धौलपुर पत्थर से तैयार किया जा रहा मोक्ष द्वार

श्मशान घाट का निर्माण करीब 89.40 करोड़ रुपये से पटना स्मार्ट सिटी और बुडको द्वारा किया जा रहा है. डिजाइन के मुताबिक इस श्मशान घाट में दो द्वार भी बनाये जा रहे हैं, जिनमें से एक मोक्ष और दूसरा बैकुंठ द्वार होगा. दोनों द्वार में कांसे से बना ओम चिह्न भी स्थापित किया जायेगा. मोक्ष द्वार को धौलपुर पत्थर से तैयार किया जायेगा. यह द्वार करीब 46.58 फुट ऊंचा रहेगा.

बन रहे दो तालाब, इनके बीच 12 फुट ऊंची आदिशक्ति की लगेगी प्रतिमा

परिसर में दो तालाब भी बनाये जा रहे है. एक लगभग तैयार हो गया है. इसमें गंगा नदी का पानी पाइप से आयेगा. इन दोनों के बीच 12 फुट की आदिशक्ति की प्रतिमा भी लगायी जायेगी. साथ ही प्रतिमा के पास फव्वारे व रंग-बिंरगी लाइटें भी लगायी जायेंगी. एमडी अनिमेष कुमार पराशर ने बताया कि आमतौर पर श्मशान घाट को नकारात्मकता और शोक से जोड़ा जाता है, जबकि आदिशक्ति की प्रतिमा शक्ति, सृजन और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. यह दुख में डूबे लोगों को एक आध्यात्मिक सहारा और शांति का अनुभव करा सकती है, जिससे उन्हें यह महसूस हो कि मृत्यु अंत नहीं, बल्कि जीवन चक्र का एक हिस्सा है.

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