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किस्त चार: बेला औद्योगिक क्षेत्र : अरबों का कारोबार, सुविधाएं शून्य

Updated at : 11 Jun 2025 7:50 PM (IST)
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किस्त चार:   बेला औद्योगिक क्षेत्र : अरबों का कारोबार, सुविधाएं शून्य

<H2>पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, स्वास्थ्य केंद्र, पार्किंग की लंबे समय से मांग कर रहे उत्तर बिहार उद्यमी संघ </H2><P><H2>वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर </H2></P> मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 और 2

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पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, स्वास्थ्य केंद्र, पार्किंग की लंबे समय से मांग कर रहे उत्तर बिहार उद्यमी संघ

वरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुर

मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र के फेज-1 और 2 में हर साल 150 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है. जो इसे उत्तर बिहार के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक बनाता है. हालांकि, आर्थिक समृद्धि के इस गढ़ में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति दयनीय है. पेयजल, सार्वजनिक शौचालय, स्वास्थ्य केंद्र, पार्किंग और यात्री ठहराव जैसी मूलभूत आवश्यकताएं यहां पूरी तरह नदारद हैं. जिससे क्षेत्र में कार्यरत लगभग 1.5 लाख श्रमिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उत्तर बिहार उद्यमी संघ लंबे समय से इन मुद्दों को उठा रहा है, लेकिन उनकी मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया है.

श्रमिकों की दुर्दशा और सुविधाओं का अभाव

बेला औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले लाखों श्रमिकों के लिए हर दिन एक चुनौती है. करीब 16 किमी. का क्षेत्र फल है. लेकिन सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था नहीं है. किसी भी आपात स्थिति या बीमारी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की कमी एक बड़ा जोखिम है. क्योंकि श्रमिकों को इलाज के लिए दूर के अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है. पार्किंग की अव्यवस्था से क्षेत्र में हर दिन जाम लगता है, जिससे परिवहन और आवागमन बाधित होता है. इसके अलावा, यात्रियों के ठहरने के लिए कोई उचित स्थान न होने से श्रमिकों को परेशानी होती है.

उत्तर बिहार उद्यमी संघ की गुहार, प्रशासन मौन

उत्तर बिहार उद्यमी संघ पिछले कई वर्षों से बेला औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं को लेकर लगातार आवाज उठा रहा है. संघ अध्यक्ष संजीव चौधरी ने बताया कि कई बार जिला प्रशासन और संबंधित सरकारी विभागों को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों से अवगत कराया है. उनकी मुख्य मांगों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति, पर्याप्त संख्या में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण, एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना, सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था और यात्री प्रतीक्षालयों का निर्माण शामिल है. संघ का तर्क है कि जब यह क्षेत्र राज्य के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, तो यहां कार्यरत श्रमिकों और उद्यमियों को न्यूनतम सुविधाएं क्यों नहीं मिलनी चाहिए. हालांकि, संघ की इन जायज मांगों को लगातार नजरअंदाज किया गया है. जिससे स्थानीय उद्यमियों और श्रमिकों में भारी निराशा है.

नये में सुविधाएं, पुराने की उपेक्षा

उत्तर बिहार उद्यमी संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि जहां बेला औद्योगिक क्षेत्र का नया विस्तारित क्षेत्र तमाम आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, वहीं पुराने फेज-1 और फेज-2 को पूरी तरह से उपेक्षित किया जा रहा है. संघ का कहना है कि नये क्षेत्र में बेहतर सड़क, जल निकासी, बिजली और अन्य बुनियादी ढांचा उपलब्ध है, जबकि डेढ़ लाख श्रमिकों को रोजगार देने वाले पुराने क्षेत्रों में पेयजल, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव बना हुआ है. यह दोहरी नीति पुराने उद्यमियों और श्रमिकों में गहरी निराशा पैदा कर रही है, जो कई वर्षों से इन सुविधाओं की मांग कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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