घोड़परास से फसल क्षति होने पर 50 हजार प्रति हेक्टेयर का मुआवजा

Updated at : 10 Mar 2025 5:12 PM (IST)
विज्ञापन
घोड़परास  से फसल क्षति होने पर 50 हजार प्रति हेक्टेयर का मुआवजा

किसी व्यक्ति की मौत पर परिजनों को दस लाख का मिलेगा मुआवजा विधानसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा सुनील कुमार ने की घोषणा संवाददाता,पटनाराज्य में घोड़परास (नीलगाय)

विज्ञापन

किसी व्यक्ति की मौत पर परिजनों को दस लाख का मिलेगा मुआवजा विधानसभा में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा सुनील कुमार ने की घोषणा संवाददाता,पटनाराज्य में घोड़परास (नीलगाय) से फसल क्षति होने पर सरकार की ओर से मुआवजा का प्रावधान किया गया है. साथ ही ऐसे ही गैर वन क्षेत्र में उनके द्वारा खतरा पैदा करने पर उनके आखेट के लिए भी प्रावधान किया गया है. पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा सुनील कुमार ने बताया कि किसानों का फसल नष्ट किये जाने पर सरकार की ओर से प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की फसल क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है. साथ ही ऐसे जानवर के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है तो 10 लाख मुआवजा का भी प्रावधान किया गया है. वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डा सुनील कुमार सोमवार को विधानसभा में मुकेश कुमार यादव, समीर कुमार महासेठ, प्रतिमा कुमार, मो अंजार नईमी और सूर्यकांत पासवान के ध्यानाकर्षण सूचना का जवाब दे रहे थे. उन्होंने बताया कि अभी तक किसी भी क्षेत्र में पूरी फसल बर्बाद करने की सूचना नहीं है. उन्होंने बताया कि घोड़परास की अधिक संख्या होने के बाद समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, नालंदा सहित विभिन्न जिलों इस वर्ष 4279 घोड़परास का आखेट किया गया है. उन्होंने बताया कि ऐसे जंगली जानवारों द्वारा किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से चोट पहुंचाने पर एक लाख 44 हजार जबकि हल्की चोट पहुंचाने पर 24 हजार की सहायता दी जाती है. उन्होंने बताया कि पहले वन प्रमंडल के द्वारा 100 घोड़परास के आखेट की जबकि मुख्य वन संरक्षक द्वारा 500 घोड़परास के आखेट की अनुमति का प्रावधान किया गया है. अभी हर पंचायत के मुखिया को यह अधिकार दिया गया है कि इसकी सूचना मिलने के बाद वह ऐसे जानवरों को आखेट करने की अनुमति देंगे. सूटरों द्वारा एक घोड़परास के आखेट करने पर 750 रूपये और उसको जमीन में गोड़ने के लिए 1250 रुपये का प्रावधान किया गया है. उन्होंने बताया कि बिहार की इस योजना का जानकारी लेने के लिए दूसरे राज्य के लोग बिहार में जानकारी के लिए आ रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola